29 जून, 2015 को सात हजार रुपये के रिश्वत के साथ पकड़ा था रंगे हाथ
पटना : गृह (विशेष) विभाग के तत्कालीन प्रशाखा पदाधिकारी (बिहार सचिवालय सेवा) संजय कुमार को बर्खास्त कर दिया गया है. संजय को 29 जून 2015 को निगरानी विभाग (अन्वेषण ब्यूरो) ने सात हजार रुपये की रिश्वत के साथ रंगे हाथ गिरफ्तार किया था.
इसके बाद संजय को न्यायिक हिरासत में केंद्रीय कारा, बेऊर भेजा गया था. 14 अगस्त 2015 को जेल से बाहर आया और 17 अगस्त 2015 को गृह (विशेष) विभाग में अपना योगदान दिया. संजय को हिरासत में लिये जाने की तिथि 29 जून 2015 के प्रभाव से अगले आदेश तक के लिए निलंबित किया गया था. निलंबन अवधि में उसको मुख्यालय आयुक्त कार्यालय पटना प्रमंडल से अटैच करने का आदेश जारी हुआ था. औपचारिकताओं के बाद विभागीय कार्रवाई शुरू हुई.
इसके लिए जल संसाधन विभाग के विशेष कार्य पदाधिकारी गोरखनाथ सिंह को संचालन पदाधिकारी बनाया गया. 28 दिसंबर 2017 को गोरखनाथ सिंह की रिपोर्ट में सभी आरोपों को पूरी तरह प्रमाणित बताया गया. इसके बाद आरोपी संजय कुमार से जवाब मांगा गया. संजय ने 9 फरवरी 2018 को जवाब दिया. संचालन पदाधिकारी की रिपोर्ट और संजय कुमार के जवाब की समीक्षा की गयी. इसके बाद पाया गया कि संजय का सरकारी कार्यों के प्रति लापरवाही एवं घोर कदाचार का आरोप प्रमाणित है. साथ ही, संजय को अपने बचाव के लिए पर्याप्त समय दिया गया.
वह अपने बचाव में कुछ ऐसा साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाया, जिससे उसे निर्दोष साबित किया जा सके. सामान्य प्रशासन के उप सचिव गुफरान अहमद की ओर से जारी संकल्प के अनुसार, तमाम तथ्यों के आधार पर अनुशासनिक प्राधिकार की ओर से संजय कुमार के अभ्यावेदन को अस्वीकृत कर दिया गया. बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 14 के संगत प्रावधान के तहत सेवा से बर्खास्तगी का दंड अधिरोपित किया गया. इन तथ्यों के आलोक में संजय को सेवा से बर्खास्तगी का दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया गया है
