मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड : समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों से सीबीआई करेगी पूछताछ

पटना : मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड को लेकर सीबीआई की सक्रियता से खलबली मची है. 17 अगस्त को बिहार सरकार की पूर्व समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा व उनके पति से पूछताछ तो हुई ही, समाज कल्याण विभाग के काउंसेलर के यहां भी टीम ने धावा बोला. अब समाज कल्याण के अधिकारियों से सीबीआई पूछताछ […]

पटना : मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड को लेकर सीबीआई की सक्रियता से खलबली मची है. 17 अगस्त को बिहार सरकार की पूर्व समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा व उनके पति से पूछताछ तो हुई ही, समाज कल्याण विभाग के काउंसेलर के यहां भी टीम ने धावा बोला. अब समाज कल्याण के अधिकारियों से सीबीआई पूछताछ करने की तैयारी में है.
इसके अलावा मुजफ्फरपुर में मास्टरमाइंड ब्रजेश ठाकुर व उससे जुड़े लोगों पर सीबीआई ने शिकंजा कसना शुरू किया है. यहां पटना में ब्रजेश ठाकुर के प्रात: कमल अखबार के दफ्तर से रजिस्टर मिला है, जिसमें दर्जनों नंबर दर्ज हैं. अब यह नंबर भी तमाम लोगों को लपेटे में लेने का कारण बनेंगे. बिहार ही नहीं पूरे देश को हिला देने वाली मुजफ्फरपुर की इस घटना की जांच की आंच में तमाम बड़े अफसर जल्दी ही लपेटे में आयेंगे. उनसे भी पूछताछ की अब बारी है. चर्चा तो यहां तक है कि पूर्व जिला पदाधिकारी तक से पूछताछ हो सकती है.
मुजफ्फरपुर के पूर्व डीएम से भी हो सकती है पूछताछ
मुजफ्फरपुर के महिला थाने में दर्ज कांड संख्या 3/2018 की जांच शुरू हो गयी है. साहू रोड, मुजफ्फरपुर स्थित सेवा संकल्प विकास समिति की ओर से संचालित बालिका गृह के अधिकार और कर्मचारी सभी बच्चियों का मानसिक, शारीरिक और यौन शोषण कर रहे थे.
इसको लेकर खूब हो-हल्ला मचा तो मामला सीबीआई को दिया गया है. मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर से नजदीकी का ही असर है कि पूर्व मंत्री मंजू वर्मा और उनके पति चंद्रेश्वर वर्मा से साढ़े छह घंटे से अधिक पूछताछ हुई है.
मंत्री पद से मंजू वर्मा को हाथ तक धोना पड़ा है. बताया जाता है कि मुजफ्फरपुर के पूर्व जिलाधिकारी (डीएम) धर्मेंद्र सिंह से भी पूछताछ हो सकती है. बालिका गृह में लड़कियों से यौनशोषण के मामले में पूछताछ का दायरा बड़े अधिकारियों से लेकर नेताओं तक बढ़ सकता है. इसमें जिले के पूर्व डीएम धर्मेंद्र सिंह का भी नाम शामिल हैं.
ब्रजेश ठाकुर के एनजीओ सेवा संकल्प व विकास समिति को बालिका गृह चलाने की स्वीकृति समाज कल्याण विभाग में निदेशक पद पर रहते हुए उन्होंने ही दी थी. इसके अलावा उनसे पहले व बाद के निदेशकों से भी पूछताछ हो सकती है. इसके अलावा, कुछ और आईएएस अफसर हैं, जिनपर सीबीआई हाथ रख सकती है. बता दें कि सीबीआई ने 17 अगस्त को बिहार में 12 स्थानों पर छापेमारी की थी. पटना में पांच ठिकानों के अलावा, बेगूसराय, मोतिहारी, मुजफ्फरपुर आदि शामिल हैं.
शिकंजे में आते ही मधु भी उठायेगी राज से पर्दा
ब्रजेश ठाकुर की राजदार मधु फिलहाल फरार है. जिस दिन वह शिकंजे में आयी, कई राज से पर्दा उठना तय है. सीबीआई उसको दबोचने की जतन कर रही है. ब्रजेश ठाकुर के इस काले कारोबार में मधु बराबर की साथी है. तमाम सरकारी कार्यालयों में उसका जाना-आना था. स्वास्थ्य विभाग से लाखों रुपये का प्रोजेक्ट हथियाने में वही मुख्य भूमिका में रहती थी.
ब्रजेश समेत 10 की पेशी, अब एक सितंबर को होगी सुनवाई
मुजफ्फरपुर : बालिका गृहकांड के मुख्य आरोपित ब्रजेश ठाकुर की शनिवार को पाॅस्को कोर्ट के विशेष न्यायाधीश आरपी तिवारी के समक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी हुई. इस दौरान उसने अपनी जान की सुरक्षा की गुहार लगायी. उसने कहा कि मुझे जेल प्रशासन ने एंटी टेरेरिस्ट सेल में रखा गया है.
मुझे जेल के किसी अन्यत्र सेल में शिफ्ट कर दिया जाये. हालांकि कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया. कोर्ट ने कहा कि यह मामला जेल व सुरक्षा से जुड़ा है. इस पर वे कोई आदेश जारी नहीं कर सकते हैं. कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख एक सितंबर को तय की है.
इससे पूर्व वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से ब्रजेश ठाकुर के अलावा विकास कुमार, इंदू कुमारी, चंदा देवी, हेमा मशीह, किरण कुमारी, मीनू देवी, नेहा कुमारी, मंजू देवी, सीपीओ रवि रौशन की पेशी हुई. आठ अगस्त को कोर्ट में पेशी के दौरान ब्रजेश ठाकुर पर स्याही फेंके जाने की घटना के बाद शनिवार को सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये थे.
बरामद कंप्यूटर खोलेंगे राज
पटना : सीबीआई की छापेमारी में ब्रजेश ठाकुर के घर, होटल और कार्यालय से मिले कंप्यूटर, लैपटॉप राज से पर्दा उठाने में मदद करेंगे. सीबीआई इन कंप्यूटरों को अपनी लैब भेजेगी. उसके बाद तमाम नयी जानकारियां सामने आ सकती हैं. इसके अलावा ब्रजेश ठाकुर के करीबियों के यहां से बरामद दस्तावेज भी केस को आसान बनायेंगे.
जाहिर है, इन दस्तावेजों के तार कहीं-न-कहीं ब्रजेश की इस काली करतूत में साथ निभाने वालों से भी जुड़े होंगे. कंप्यूटर की जांच कराने के बाद बहुत कुछ साफ हो जायेगा. ब्रजेश से रिश्ता रखने वालों पर सीबीआई ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. जल्दी ही स्वास्थ्य और समाज कल्याण विभाग के वर्तमान और कुछ पूर्व पदाधिकारियों से भी पूछताछ होगी. यह भी खुलासा हुआ है कि कई ऐसी संचिकाएं भी हैं, जिसमें समाज कल्याण विभाग ने प्रावधानों के विपरीत जाकर ब्रजेश ठाकुर के एनजीओ की मदद की है.
इनमें कई ऐसे भी कागजात हैं जिससे स्पष्ट होता है कि ब्रजेश ठाकुर के एनजीओ की ऑडिट रिपोर्ट प्राप्त किये बिना ही विभाग ने उसे नया फंड उपलब्ध कराया है. इस मेहरबानी की वजह भी सीबीआई तलाश रही है.
17 अगस्त को सीबीआई की टीम ने प्रदेश में 12 ठिकानों पर छापेमारी की थी. इसमें ब्रजेश ठाकुर, उसके करीबियों सहित बिहार सरकार की पूर्व समाज कल्याण विभाग की मंत्री मंजू वर्मा के ठिकाने शामिल थे. मंजू वर्मा के पति चंद्रेश्वर वर्मा से भी घंटों पूछताछ हुई थी.
तमाम कागजात भी सीबीआई साथ ले गयी. पूछताछ के दौरान सीबीआइ ने मंजू वर्मा के कई हस्ताक्षरों का भी सत्यापन कराया. जब कुछ सवालों के जवाब देने में मंजू वर्मा और उनके पति परेशान होने लगे, तब सीबीआइ के अधिकारियों ने उनके आप्त सचिव रहे अमरेश कुमार अमर और उनकी पत्नी पूनम कुमारी को भी उनके सरकारी आवास पर तलब कर लिया था. जानकारी तो यह भी मिल रही है कि मंजू वर्मा पूछताछ के दौरान बार-बार आप्त सचिव का नाम ले रही थीं. वह बता रही थीं कि इस संबंध में उन्हें ही जानकारी होगी. इससे साफ है कि आप्त सचिव अमरेश कुमार की भी राह आगे आसान नहीं होगी.
जल्दी ही स्वास्थ्य और समाज कल्याण विभाग के वर्तमान और कुछ पूर्व पदाधिकारियों से भी पूछताछ होगी. दूसरी ओर, यह भी खुलासा हुआ है कि कई ऐसी संचिकाएं भी हैं, जिसमें समाज कल्याण विभाग ने प्रावधानों के विपरीत जाकर ब्रजेश ठाकुर के एनजीओ की मदद की है. इनमें कई ऐसे भी कागजात हैं जिससे स्पष्ट होता है कि ब्रजेश ठाकुर के एनजीओ की ऑडिट रिपोर्ट प्राप्त किये बिना ही विभाग ने उसे नया फंड उपलब्ध कराया है. इस मेहरबानी की वजह भी सीबीआई तलाश रही है.
17 अगस्त को सीबीआई की टीम ने प्रदेश में 12 ठिकानों पर छापेमारी की थी. इसमेंब्रजेश ठाकुर, उसके करीबियों सहित बिहार सरकार की पूर्व समाज कल्याण विभाग की मंत्री मंजू वर्मा के ठिकाने शामिल थे.
मंजू वर्मा के पति चंद्रेश्वर वर्मा से भी घंटों पूछताछ हुई थी. तमाम कागजात भी सीबीआई साथ ले गयी. पूछताछ के दौरान सीबीआइ ने मंजू वर्मा के कई हस्ताक्षरों का भी सत्यापन कराया. जब कुछ सवालों के जवाब देने में मंजू वर्मा और उनके पति परेशान होने लगे, तब सीबीआइ के अधिकारियों ने उनके आप्त सचिव रहे अमरेश कुमार अमर और उनकी पत्नी पूनम कुमारी को भी उनके सरकारी आवास पर तलब कर लिया था. जानकारी तो यह भी मिल रही है कि मंजू वर्मा पूछताछ के दौरान बार-बार आप्त सचिव का नाम ले रही थीं. वह बता रही थीं कि इस संबंध में उन्हें ही जानकारी होगी. इससे साफ है कि आप्त सचिव अमरेश कुमार की भी राह आगे आसान नहीं होगी.
महिला संगठनों ने नीतीश मोदी का मांगा इस्तीफा
पटना : मुजफ्फरपुर सहित अन्य शेल्टर होम में यौन उत्पीड़न को लेकर कई महिला संगठनों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी से इस्तीफा मांगा है. कहा है कि इनके रहते निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती है.
पटना के आसरा शेल्टर में दो महिलाओं की मौत संदेहास्पद है. इसको लेकर पटना के आइएमए हाॅल में शनिवार को महिला संगठनों ने जनसंवाद का आयोजन किया. इसमेें कुछ प्रस्ताव पास किये गये. इनमें सभी 110 शेल्टरों की जांच सीबीआई से कराने, मुख्यमंत्री व डिप्टी सीएम को इस्तीफा देने और सुरेश शर्मा को तुरंत बर्खास्त करने, केरल में बाढ़ की विपदा पर सहयोग, अग्निवेश और मोतिहारी विवि में प्रो संजय कुमार पर हमले की तीखी निंदा की गयी.

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