पटना में लापरवाही : हॉस्टल में रहनेवाली छात्राओं की सुरक्षा और सेहत के साथ हो रहा है खिलवाड़

अनुराग प्रधान एक अपार्टमेंट और तीन अलग-अलग गर्ल्स हॉस्टल पटना : मुजफ्फरपुर के बालिका गृह में लड़कियों के साथ रेप जैसी वारदात हुई. इससे लड़कियों की सुरक्षा पर तमाम सवाल खड़े हुए हैं. पटना में भी अपने घर परिवार से दूर लड़कियां पढ़ाई करने के लिए प्राइवेट हॉस्टलों में आकर रहती हैं. इन हॉस्टलों में […]

अनुराग प्रधान

एक अपार्टमेंट और तीन अलग-अलग गर्ल्स हॉस्टल
पटना : मुजफ्फरपुर के बालिका गृह में लड़कियों के साथ रेप जैसी वारदात हुई. इससे लड़कियों की सुरक्षा पर तमाम सवाल खड़े हुए हैं. पटना में भी अपने घर परिवार से दूर लड़कियां पढ़ाई करने के लिए प्राइवेट हॉस्टलों में आकर रहती हैं. इन हॉस्टलों में सुरक्षा के नाम पर घोर लापरवाही बरती जा रही है. पटना के हॉस्टल, छोटे-छोटे कमरे, कमरे भी प्लाई बोर्ड से पार्टिशन वाले. कमरों में एक-दो तख्त सरीखे बिस्तर, एक छोटी-सी अलमारी. अलमारी पर ही पूरी किताबें और एक कोने में कपड़ों का बैग. घर से लाये कुछ समान का डिब्बा बेड के नीचे. गंदे कॉमन टॉयलेट के साथ तमाम शिकायतें. यह हाल गर्ल्स हॉस्टल का है. ये आपको हॉस्टल कम, कबूतरखाना अधिक लगेंगे. इसी तरह के हॉस्टलों का जाल बुद्धा कॉलोनी में है. बुद्धा कॉलोनी है, तो आवासीय कॉलोनी, लेकिन इस कॉलोनी के अधिकांश घरों में हॉस्टल का संचालन हो रहा है. बुद्धा कॉलोनी पहुंचते ही आपको कई ऐसे लोग मिल जायेंगे.
हॉस्टल के गेट पर नहीं है लोकल थाने का नंबर
बुद्धा कॉलोनी में किसी भी हॉस्टल के गेट पर लोकल थाने के टेलीफोन नंबर नहीं चिपके हुए हैं. हॉस्टल में रहने वाली छात्राएं कहती हैं कि हॉस्टल में लड़कियों की हिफाजत के लिए कोई व्यापक तैयारी नहीं है. कुछ ही हॉस्टलों में साफ-सफाई का पूरा ख्याल रखा जाता है. छात्राएं कहती हैं कि 95 प्रतिशत हॉस्टलों में रहने व खाने के इंतजाम ठीक नहीं हैं. जबकि इसके लिए मोटी रकम वसूली जाती है और सुविधा के नाम पर कुछ खास नहीं है. एक छात्रा रोशनी कहती है कि घर-परिवार से दूर हॉस्टल में रह कर कोचिंग में पढ़ाई व बेहतर भविष्य बनाने के लिए जीतोड़ मेहनत करती हूं. पर ढंग का खाना नसीब नहीं होेता.
इस तरह होता है एग्रीमेंट
हॉस्टल का कारोबार कर लाखों रुपये कमाये जा रहे हैं. हॉस्टल के लिए किराये पर मकान लेते समय मकान मालिक और हॉस्टल संचालक के बीच में लीगल एग्रीमेंट होता है, जिस में तमाम तरह की शर्तों के साथ हर साल 5 से 10 प्रतिशत किराया बढ़ाने का जिक्र होता है.
कई हॉस्टलों की स्थिति भी नहीं है ठीक
बुद्धा कॉलोनी के कई मकानों में चलने वाले हॉस्टलों में प्लाई लगवा कर छोटे-छोटे कमरे बना दिये गये हैं. उन कमरों में दो-तीन चौकियां लगी दी गयी हैं. कई रूम में तो रोशनी और हवा आने-जाने के लिए ठीक से खिड़कियां तक भी नहीं हैं. गंदे बाथरूम व टॉयलेट, संकरी सीढ़ियां हैं. वैसे कुछ अपार्टमेंटों में रूम ठीक-ठाक हैं. यहां रहने वाली छात्राएं कहती हैं कि पानी की तरह चाय मिलती है. पानी की टंकियां वर्षों से साफ नहीं हुई हैं. गेट पर सिक्योरिटी के नाम पर बूढ़ा व कमजोर गार्ड रहता है. इस इलाके के तमाम गर्ल्स हॉस्टलों का ऐसा ही हाल है. यहां कई लोग मकान या फ्लैट लेकर हॉस्टल चला रहे हैं. खाने पीने की व्यवस्था भी काफी लचर रहती है. हॉस्टल में रहने वाली एक छात्रा बताती है कि 10×8 फुट के कमरे में तीन चौकियां लगी हुई हैं. तीन बेडों का किराया 6 हजार है. मोल-भाव करने पर 55 सौ रुपये में मिल जाता है. यहां खाने में घटिया चावल और उस के साथ पानी जैसी दाल दी जाती है.
हॉस्टलों के पास फल-फूल रहे हैं अन्य कारोबार
इस इलाके में कोचिंग के कारोबार के साथ कई अन्य धंधे भी चल रहे हैं. कोचिंग संस्थानों के आसपास ब्यूटी पार्लर और ब्वायज हॉस्टल भी हैं. किताब-कॉपियों की दुकानें, टिफिन वालों का कारोबार भी है. इस इलाके में रहनेवाली ज्यादातर छात्राएं मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी करने वाली हैं. हॉस्टलों के बाहर सुरक्षा का काफी अभाव रहता है. सुरक्षा के नाम पर केवल खिड़कियां बंद कर दी जाती हैं. लोहे का बड़ा-सा गेट लगा दिया जाता है. वैसे छात्राएं कहती है कि हॉस्टल से बाहर जाने पर रजिस्टर में टाइम नोट करना पड़ता है. छात्राएं कहती हैं कि ज्यादातर गर्ल्स हॉस्टल के संचालक पुरुष हैं.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >