आईजीआईएमएस में इंडोस्कोपी, सिटी स्कैन व अल्ट्रासाउंड के लिए 20 दिनों का इंतजार
पटना : आरा जिले के रहनेवाले मुकेश कुमार के पेट में कई हफ्ते से दर्द था. स्थानीय डॉक्टर से इलाज कराने के बाद भी कोई लाभ नहीं हुआ. लोगों की सलाह पर उसने आईजीआईएमएस में डॉक्टर से दिखाया. डॉक्टर ने दवा लिखने के साथ ही अल्ट्रासाउंड करने को कहा.
अल्ट्रासाउंड के लिए मुकेश के पिता को 20 दिन बाद का डेट मिला है. कुछ इस तरह की परेशानी बक्सर निवासी राकेश के साथ भी हुई. डॉक्टर को दिखाने के बाद अल्ट्रासाउंड के लिए 23 दिन बाद का नंबर दिया गया है. दरअसल आईजीआईएमएस में डॉक्टर तो समय पर देख लेते हैं.
लेकिन, जब मरीज अल्ट्रासाउंड, सिटी स्कैन या इंडोस्कोपी जांच को जाते हैं 20 दिन बाद का नंबर दिया जाता है. नतीजा मरीज इलाज के इंतजार में दर्द झेलने को मजबूर रहते हैं.
परेशान हो रहे हैं मरीज : ओपीडी में इलाज के लिए मरीजों को दो से तीन दिन भटकना पड़ता है. इसके मरीज डॉक्टर के पास पहुंच पाते हैं. लेकिन, रेडियोलॉजी जांच के बाद इंडोस्कोपी, कोलोनोस्कोपी और सिटी स्कैन व अल्ट्रासाउंड के लिए मरीजों का 20 से 25 दिन बाद नंबर आता है. ऐसे में मरीजों को इंतजार करना पड़ता है.
हर दिन पेट से संबंधित 200 मरीज
आईजीआईएमएस में पटना के साथ बिहार के दूसरे जिलों से भी मरीज आते हैं. खासकर पेट रोग के रोजाना 200 मरीज आते हैं. डॉक्टरों का कहना है कि इनमें लगभग 30 मरीज गंभीर बीमारी से ग्रस्त होते हैं. इनके लिए अल्ट्रासाउंड जांच लिखा जाता है. इससे अल्ट्रासाउंड करानेवाले मरीजों की संख्या अन्य जांच की अपेक्षा काफी अधिक होती है. मरीजों की जांच में लगने वाले अधिक समय के कारण वेटिंग लिस्ट लंबी हो गयी है. यही स्थिति इंडोस्कोपी मशीन के साथ भी है.
नहीं बढ़ रही मशीनों की संख्या
आईजीआईएमएस में इंडोस्कोपी, अल्ट्रासाउंड व इको मशीनों की क्षमता कम होने की वजह से यह समस्या सामने आ रही है. सूत्रों की मानें, तो पिछले तीन साल से यहां अल्ट्रासाउंड, इको, सिटी स्कैन आदि मशीन को बढ़ाने की बात चल रही है. लेकिन, यह बातें सिर्फ कागजों में ही चल रही हैं. उपकरण कम होने के चलते जहां जांच समय पर नहीं हो पा रही, वहीं दूसरी ओर दलालों का कब्जा जमा हुआ है.
क्या कहते हैं अधिकारी
मरीजों की संख्या अधिक होने के चलते वेटिंग दी जाती है. हालांकि, जो गंभीर मरीज होते हैं उनकी तुरंत जांच करा कर इलाज करने का आदेश जारी किया गया है. जिन जांच में वेटिंग चल रही, उन मशीनों की संख्या बढ़ायी जायेगी. मशीन बढ़ते ही वेटिंग की परेशानी खत्म हो जायेगी.
—डॉ एनआर विश्वास, डायरेक्टर, आईजीआईएमएस
