पटना : बालू भंडार के आकलन के लिए नदियों और उसके किनारों का हर साल माॅनसून के पहले और उसके बाद में थ्रीडी मैपिंग और एरियल सर्वे किया जायेगा. इसकी शुरुआत गुरुवार से होने की संभावना है. इसका मकसद बाढ़ के दौरान नदियों में नये बालू जमाव की स्थिति का पता लगाना है और अवैध खनन को रोकना है. इसके आधार पर ही बालू खनन की अनुमति दी जायेगी. इससे नदियों का संरक्षण हो सकेगा और यह पर्यावरण संतुलन बनाने की दिशा में मददगार साबित होगा.
खान एवं भूतत्व विभाग के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि नेशनलग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशों के अनुसार एक जुलाई से 30 सितंबर तक नदियों में बालू खनन पर प्रतिबंध है. वहीं बंदाबस्तधारियों ने बालू की आपूर्ति जारी रखने के लिए इसका पर्याप्त भंडारण किया है. अब अवैध खनन की मॉनिटरिंग के लिए ड्रोन और एरियल सर्वे की मदद ली जायेगी. साथ ही बाढ़ के दौरान नदियों में बालू के जमाव के अध्ययन के लिए भी थ्री डी मैपिंग और एरियल सर्वे किया जायेगा.
मंत्रालय ने दिया था निर्देश
विभाग ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की अधिसूचना के आधार पर इस मसले पर अध्ययन के लिए पांच सदस्यीय टास्क फोर्स का गठन किया था. इसकी रिपोर्ट के आधार पर नदियों और नदी घाटों का थ्रीडी मैपिंग और एरियल सर्वे कराने का निर्णय लिया गया है.
दरअसल, मंत्रालय ने वर्ष 2016 में बालू खनन प्रबंधन संबंधी निर्देश में कहा था कि हर साल बारिश के पहले और इसके बाद राज्य की सभी नदियों में बालू के जमाव का अध्ययन आवश्यक है.
