प्रदेश भर में एक लाख गर्भवतियों के स्वास्थ्य की जांच की गयी
पटना : प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान में बिहार ने अपने पुराने रिकाॅर्ड को तोड़ डाला है. जून की जो ग्रेडिंग जारी हुई है उसमें बिहार देश के पांच राज्यों में पहले नंबर पर है. जून में में सुरक्षित मातृत्व अभियान में करीब एक लाख गर्भवती जांच के लिए पहुंचीं. प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत हर महीने की नौ तारीख को गर्भवतियों की जांच होती है. इसके लिए 589 सेंटर बनाये गये हैं.
ये सेंटर मेडिकल कॉलेज से पीएचसी तक में हैं. अभियान में सरकारी डॉक्टर तो जांच करते ही हैं, निजी डॉक्टरों से भी अपील की जाती है कि वे भी सहयोग करें. 253 निजी डॉक्टरों ने इस अभियान के लिए अपना निबंधन तो करा रखा है लेकिन आते हैं गिनती को दो-चार ही. मई में 52376 गर्भवती जांच के लिए आयी थीं, इसमें तीन और छह माह की गर्भवती थीं. स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि प्रधानमंत्री मातृत्व अभियान में बिहार ने अच्छा काम किया है. इसके लिए यहां के चिकित्सक बधाई के पात्र हैं.
जून में एक लाख गर्भवतियों की जांच
जून में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत करीब एक लाख महिलाओं की जांच हुई. यह पूरे देश में सबसे अधिक है. इसमें करीब 63 हजार से अधिक एेसी महिलाएं थीं, जो तीन से छह माह की गर्भवती थीं. 32 हजार गर्भवती पहली बार जांच के लिए आयी थीं.
जून के अभियान की ग्रेडिंग में बिहार पहले स्थान पर रहा. इसके बाद महाराष्ट्र में 28152, राजस्थान में 22900, यूपी में 21539 और आंध्र प्रदेश में 14593 तीन से छह माह की गर्भवतियों की जांच हुई. राज्य में साल में 30 लाख बच्चों का जन्म होता है. सरकार गर्भावस्था से लेकर प्रसव तक और उसके बाद भी उनका ख्याल रखती है. तीन बार प्रसव पूर्व जांच की व्यवस्था है.प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत हर महीने की नौ तारीख को गर्भवती महिलाओं की जांच होती है.
दो डॉक्टर सम्मानित
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व
अभियान में सहयोग करने वाले दो निजी चिकित्सक कटिहार की रंजना झा और मधुबनी के हरिनारायण को 29 जून को नयी दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने सम्मानित किया था.
