पटना : सांसदों, विधायकों और वरिष्ठ नौकरशाहों के फर्जी लेटर हेड से VIP कोटे से रेलवे में टिकट बुक कराने का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है. ऐसा लग रहा है कि यह खेल देश के विभिन्न जगहों पर जारी है और इसके पीछे एक बड़े गिरोह का हाथ है. ताजा मामला सारण के सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रुडी के फर्जी लेटर पैड पर टिकट कन्फर्म कराने का मामला प्रकाश में आया है. एजेंट ने फर्जी लेटर के जरिये कोटा लगवाकर मुरादाबाद से पटना तक श्रमजीवी एक्सप्रेस में एसी टू बोगी में बर्थ बुक कराया गया था. बर्थ श्रमजीवी एक्सप्रेस में एसी टू बोगी में 30 जून को (पीएनआर 2248142271) कन्फर्म कराया गया. बताया जा रहा है कि टिकट कन्फर्म कराने के बदले जेंट ने दरभंगा की महिला यात्री से दोगुना पैसे वसूले थे. मामला संज्ञान में आने पर रेलवे बोर्ड से लेकर पूर्व मध्य रेलवे तक में हड़कंप मचा हुआ है. रेलवे सुरक्षा बल की विशेष टीम जांच में जुट गयी है.
जानकारी के मुताबिक सांसद के लेटर पैड पर दरभंगा की एक महिला का टिकट कन्फर्म कराने की सिफारिश देख रेलवे बोर्ड के एक अधिकारी को शक हुआ. जिसके बाद सांसद के पीए से बात की तो उन्होंने इस सिफारिश को सिरे से खारिज कर दिया. इसके बाद रेलवे हरकत में आया. मुरादाबाद से आरपीएफ की विशेष टीम ट्रेन के उसी कोच में पटना तक आयी. रास्ते में उस टिकट पर सफर कर रही महिला यात्री से पूछताछ की गयी. उसके बाद पटना जंक्शन पर भी पूछताछ की गयी. अब दानापुर और समस्तीपुर मंडल की आरपीएफ की विशेष टीम जांच में जुट गयी है.
वहीं, महिला यात्री ने दरभंगा के एजेंट आशीष केडिया से टिकट लेने की बात मानी है. उसने कहा कि उसे नहीं पता कैसे केडिया टिकट कन्फर्म कराने का दावा कर रहा था. महिला यात्री द्वारा बताये गये एजेंट के दरभंगा स्थित ठिकाने पर छापेमारी की गयी लेकिन वह गायब मिला.
दानापुर मंडल के वरीय अधिकारी ने बताया कि रेलवे बोर्ड की जांच में सांसद के फर्जी लेटर पैड के जरिये टिकट कन्फर्म कराने का मामला प्रकाश में आया है. जांच के लिए विशेष टीम बना दी गयी है. फर्जी लेटर पैड का इस्तेमाल करने वाले एजेंट की तलाश में छापेमारी जारी है.
गौरतलब हो कि पिछले महीने ही बिहार के लोकायुक्त, उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव समेत कई राज्यों के वरिष्ठ नौकरशाहों, सांसदों और विधायकों के फर्जी लेटर हेड पर वीआईपी कोटे से रेलवे टिकट आरक्षित कराने वाले एक युवक को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया था. मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ का रहने वाला आरोपित युवक टिकट आरक्षित कराने के लिए प्रति लेटर हेड 1200-2400 रुपये वसूलता था. मुंबई के एक जीआरपी अधिकारी ने बताया था कि आरोपित देवप्रताप सिंह वेटिंग लिस्ट वाले यात्रियों को यह फर्जी पत्र बेचता था और उनसे प्रति पत्र 1200-2400 रुपये वसूलता था.
अधिकारी ने बताया था कि अबतक की जांच के दौरान सामने आया है कि उसने महाराष्ट्र के एससीएस (गृह), उत्तरप्रदेश के मुख्य सचिव और बिहार के लोकायुक्त समेत विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ नौकरशाहों, सांसदों और विधायकों के फर्जी लेटर हेड तैयार किये हैं. डीसीपी (जीआरपी) समधन पवार ने कहा कि देवप्रताप सिंह प्रति पत्र करीब 1200-2400 रुपये लेता था. वह पिछले दो सालों से ऐसा कर रहा है.
