सरकारी खातों में पड़ी है छात्रवृत्ति जिलों में चक्कर काट रहे विद्यार्थी

बांका, नवादा, खगड़िया, गया, गोपालगंज जिलों में परेशान हैं छात्र पटना : प्रदेश सरकार के प्रयासों पर उनके ही पदाधिकारी पानी फेर रहे हैं. यह सब जिला स्तर पर हो रहा है. खातों में धनराशि पड़ी है और छात्रवृत्ति के लिए विभिन्न जिलों में विद्यार्थी चक्कर काट रहे हैं. छात्रवृत्ति योजनाओं को लेकर जिला कल्याण […]

बांका, नवादा, खगड़िया, गया, गोपालगंज जिलों में परेशान हैं छात्र

पटना : प्रदेश सरकार के प्रयासों पर उनके ही पदाधिकारी पानी फेर रहे हैं. यह सब जिला स्तर पर हो रहा है. खातों में धनराशि पड़ी है और छात्रवृत्ति के लिए विभिन्न जिलों में विद्यार्थी चक्कर काट रहे हैं. छात्रवृत्ति योजनाओं को लेकर जिला कल्याण पदाधिकारियों की यह लापरवाही सरकार की छवि भी धूमिल कर रही है. खातों में पर्याप्त धनराशि होने के बावजूद आवंटन समय से नहीं हो पा रहा है. बांका, नवादा, खगड़िया, गया, गोपालगंज जिलों में विद्यार्थी जिला मुख्यालयों के चक्कर काट रहे हैं और सरकार को कास रहे हैं. छात्रवृत्ति बांटने में यहां इतनी हीला-हवाली की गयी है कि इन जिलों के कल्याण पदाधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है. इतना ही नहीं, 10 और ऐसे जिले हैं, जहां की स्थिति ठीक नहीं है. इन जिलों के कल्याण पदाधिकारियों को मुख्यालय तलब किया गया है.
पिछड़ा वर्ग एवं
अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने फिसड्डी जिलों को किया चिह्नित
आवंटन समय से नहीं हो पा रहा है, जिलों के पदाधिकारी को मुख्यालय में किया तलब
मुख्यालय की समीक्षा में खुली पोल
पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की ओर से विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दी जाती है. प्राथमिकता में रखते हुए सरकार इसके लिए पैसे जारी करती है. बावजूद इसके विद्यार्थियों को राहत नहीं मिल पा रही है. मुख्यालय ने समीक्षा की तो इसकी पोल खुली है. यह भी जानकारी मिली है कि जिला स्तर पर परेशान विद्यार्थियों से कुछ कल्याण पदाधिकारी ठीक तरह से बात भी नहीं करते. व्यवहार को लेकर ज्यादा शिकायतें हैं. इसके अलावा समीक्षा में यह बात भी सामने आयी कि अधिकतर जिलों की प्रगति धीमी है. ऐसे जिलों को चिह्नित किया गया है. जमुई, नवादा, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, सीवान, अरवल, गया, गोपालगंज, बांका, खगड़िया ऐसे ही जिलों में शामिल हैं. इन जिलों के कल्याण पदाधिकारियों को नौ जुलाई को मुख्यालय में तलब किया गया है.
सृजन घोटाले से भी नहीं ली सीख
पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग का सालाना बजट करीब 1500-1600 करोड़ रुपये का होता है. इतनी बड़ी राशि से विभाग विभिन्न योजनाओं के तहत जनता के हित में काम करता है. तमाम योजनाओं में वित्तीय गड़बड़ी की आशंका बनी रहती है. सृजन घोटाला होने के बाद मुख्यालय स्तर से गंभीरता से मॉनीटरिंग नहीं हो रही है फिर भी अधिकारी सीख नहीं ले रहे हैं. सूत्रों की मानें तो गंभीरता से वित्तीय मामलों की जांच नहीं होने के ही कारण सृजन जैसे घोटाले होते हैं.
अगर लगातार मुख्यालय से अधिकारियों को जिलों में भेज कर जांच करायी जाये तो ऐसी नौबत नहीं आयेगी. अगर कहीं कोई गड़बड़ी की शुरुआत भी होगी तो पकड़ में आ जायेगा. छुपाना मुश्किल होगा. बावजूद इसके सचिवालय के अधिकारियों को जिलों में भेजने से आला पदाधिकारी कतराते हैं.

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