पटना यूनिवर्सिटी में मनुस्मृति जलाने के बाद कैंपस में पोस्टर पॉलिटिक्स, रातोंरात लगे भड़काऊ नारे

Patna University News: पटना यूनिवर्सिटी में मनुस्मृति जलाने से शुरू हुआ विवाद अब पोस्टरों की जंग में बदल गया. सावरकरवाद और पटेलवाद के नारों के बीच पटना कॉलेज का माहौल बेहद गरम है। आखिर क्या है इस नए विवाद की वजह.

Patna University News: पटना में रहने वाले लोकप्रिय कवि आलोक धन्वा की चर्चित कविता “गोली दागो पोस्टर” सिर्फ साहित्य जगत में ही नहीं, बल्कि छात्र राजनीति में भी लंबे समय से एक प्रतीक की तरह देखी जाती रही है. उसी पटना में इन दिनों पटना विश्वविद्यालय में जो पोस्टर सामने आए हैं, उसने पूरे कैंपस का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है और बहस को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है.

बिहार की राजनीति, खासकर छात्र राजनीति में पोस्टरों के जरिए अपनी बात रखने की परंपरा नई नहीं है. अलग-अलग संगठन हमेशा से दीवारों को अपने समर्थन और विरोध के माध्यम के रूप में इस्तेमाल करते रहे हैं. लेकिन इस बार विश्वविद्यालय परिसर में लेकिन इस बार मामला ज्यादा संवेदनशील और राजनीतिक रूप लेता दिख रहा है.

पोस्टरों की पॉलिटिक्स

रविवार की सुबह जब छात्र सोकर उठे, तो विश्वविद्यालय के हर कोने में एक खास तरह के पोस्टर नजर आए. इन पोस्टरों पर सीधे तौर पर ‘शरियाबाद’ और ‘मीमवाद’ को बर्बाद करने की बात कही गई है, साथ ही साथ ‘अंबेडकरवाद’, ‘सावरकरवाद’ और ‘पटेलवाद’ जिंदाबाद के नारे बुलंद किए गए हैं.

इन पोस्टरों ने न केवल छात्रों का ध्यान खींचा है, बल्कि प्रशासन की भी नींद उड़ा दी है. बताया जा रहा है कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े छात्र नेता वरुण कुमार सिंह के नेतृत्व में यह पोस्टर अभियान चलाया गया है, जो अब चर्चा का केंद्र बना हुआ है. माना जा रहा है कि ये पोस्टर हाल ही में मनुस्मृति जलाने की घटना के विरोध में लगाए गए हैं.

मनुस्मृति दहन और UGC मुद्दा

इस पूरे विवाद की जड़ें पिछले कुछ दिनों से जारी छात्र आंदोलनों में छिपी हैं. दरअसल, यूजीसी (UGC) के मुद्दे पर पटना में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. इसी बीच, पटना विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष मनीष यादव ने एक कार्यक्रम के दौरान मंच पर सार्वजनिक रूप से ‘मनुस्मृति’ जला दी और कुछ विवादित बयान दिए.

मनुस्मृति जलाने की इस घटना ने वैचारिक मतभेदों को एक नई आग दे दी. यह ‘पोस्टर वॉर’ इसी घटना के प्रतिशोध के रूप में देखा जा रहा है, जहां एक पक्ष मनुस्मृति के दहन को सही ठहरा रहा है, तो दूसरा पक्ष इसे भारतीय संस्कृति पर हमला मानकर विरोध में उतर आया है.

UGC मुद्दे के बीच बढ़ा तनाव

इसी बीच यूजीसी से जुड़े मुद्दों को लेकर भी छात्र संगठनों का विरोध जारी है. बीते दिनों पटना में मशाल जुलूस निकाला गया और कॉलेज कैंपस में प्रदर्शन हुए. ऐसे माहौल में पोस्टरों का सामने आना इस बात का संकेत है कि विश्वविद्यालय की राजनीति अब और ज्यादा आक्रामक हो गई है.

पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन फिलहाल स्थिति पर नजर रखे हुए है ताकि यह वैचारिक मतभेद किसी हिंसक टकराव में न बदल जाए.

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लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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