Patna News: “जले हुए घाव के पीछे हजारों सपने दबे होते हैं…” पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू के इन शब्दों ने रविवार को पटना के ऊर्जा ऑडिटोरियम में मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर दीं. बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के एक विशेष कार्यक्रम में चीफ जस्टिस ने साफ कर दिया कि खुलेआम तेजाब बेचना अब सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि मानवता के खिलाफ जंग है.
उन्होंने कहा कि तेजाब हमले के शिकार लोगों को अब ‘दिव्यांगता’ की श्रेणी में रखा गया है, जिससे उन्हें सरकारी योजनाओं और आरक्षण का लाभ मिल सकेगा.
तेजाब हमले के पीड़ित दिव्यांग श्रेणी में
चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू ने कहा कि एसिड अटैक के शिकार लोगों को दिव्यांगता की श्रेणी में रखा गया है, जिससे उन्हें विशेष सुविधाएं मिल सकें. उन्होंने यह भी दोहराया कि एसिड की बिक्री पर पहले से ही सख्त रोक है, लेकिन इसके बावजूद घटनाएं चिंता का विषय हैं.
पटना हाईकोर्ट के न्यायाधीश राजीव रंजन प्रसाद ने स्पष्ट किया कि एसिड पीड़ितों को सरकारी ही नहीं, निजी अस्पतालों में भी मुफ्त इलाज मिलना उनका अधिकार है. उन्होंने सुझाव दिया कि सभी अस्पतालों में स्पष्ट रूप से बोर्ड लगाया जाए, ताकि पीड़ितों को यह जानकारी आसानी से मिल सके.
पटना हाईकोर्ट के जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद ने स्वास्थ्य विभाग को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि अब हर सरकारी और निजी अस्पताल के बाहर एक स्पष्ट बोर्ड लगा होना चाहिए. इस बोर्ड पर लिखा होगा कि “यहां एसिड अटैक पीड़ितों का मुफ्त इलाज होता है.”
बढ़ रही है घटनाओं की संख्या
बिहार में एसिड अटैक की घटनाएं चिंता का विषय बनती जा रही हैं. समाज कल्याण विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जहां साल 2021 में ऐसे 176 मामले सामने आए थे, वहीं 2023 तक यह संख्या बढ़कर 207 पहुंच गई है.
इन्हीं बढ़ती घटनाओं को देखते हुए अब सरकार ने जांच प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाने की दिशा में कदम उठाए हैं. गृह विभाग ने फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की संख्या बढ़ा दी है, ताकि मामलों की जांच तेजी से हो सके और दोषियों को जल्द सजा मिल पाए.
पटना हाईकोर्ट के जस्टिस मोहित कुमार शाह के अनुसार, नए प्रावधानों के तहत एसिड अटैक के दोषियों को कम से कम 10 साल की सजा दी जाएगी, जो अधिकतम उम्रकैद तक बढ़ सकती है. यह सख्ती इस गंभीर अपराध पर लगाम लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.
181 हेल्पलाइन पर मिलेगी मदद
बिहार के डीजीपी विनय कुमार ने पुलिस महकमे को निर्देश दिया है कि एसिड अटैक जैसी जघन्य घटना होने पर रेंज आईजी और डीआईजी को खुद घटनास्थल का दौरा करना होगा. राज्य में 2012 से अब तक 160 मामले सामने आए हैं, जिनमें से 104 पीड़ितों को 2.55 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जा चुका है.
पीड़िताओं की काउंसलिंग और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं. किसी भी आपात स्थिति या कानूनी सलाह के लिए विभाग ने हेल्पलाइन नंबर ‘181’ जारी किया है, जहां पीड़ित अपनी पहचान गुप्त रखकर भी मदद मांग सकते हैं.
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