Patna-Arrah-Sasaram Greenfield Corridor: बिहार में पटना से आरा और सासाराम के बीच सफर को तेज और आसान बनाने वाली बड़ी सड़क परियोजना फिलहाल जमीन के इंतजार में अटकी है. 121 किलोमीटर लंबे पटना-आरा-सासाराम फोरलेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के लिए निर्माण एजेंसी करीब एक साल से काम शुरू करने की अनुमति का इंतजार कर रही है. परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 1715 करोड़ रुपये है.
नियम के अनुसार, निर्माण शुरू करने के लिए कम से कम 80 प्रतिशत यानी करीब 97 किलोमीटर जमीन उपलब्ध होनी चाहिए. फिलहाल एजेंसी को करीब 87 किलोमीटर जमीन ही मिल पाई है. यानी करीब 10 किलोमीटर जमीन और मिलने के बाद निर्माण शुरू करने की जरूरी शर्त पूरी हो सकेगी.
तीन जिलों में जमीन का हाल
पटना: इस प्रोजेक्ट के लिए पटना जिले में लगभग 18 किलोमीटर जमीन की जरुरत थी. इसे जिला प्रशासन की तरफ से उपलब्ध भी करा दिया गया. लेकिन प्रभावित लोगों को मुआवजा नहीं मिल पाया है.
भोजपुर: यहां सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है. टोटल 62 किलोमीटर जमीन की जरूरत है, इसमें से 26 किलोमीटर जमीन अभी भी एजेंसी को मिलना बाकी है.
रोहतास: जिले में 41 किलोमीटर जमीन की जरूरत है. इसमें से करीब 7 किलोमीटर जमीन अभी उपलब्ध नहीं हो सकी है. इस तरह भोजपुर और रोहतास में जमीन अधिग्रहण पूरा होना परियोजना की सबसे बड़ी जरूरत है.
कहां से गुजरेगा नया कॉरिडोर?
यह ग्रीनफील्ड कॉरिडोर मौजूदा आरा-सासाराम सड़क के समानांतर विकसित किया जाएगा. इसकी शुरुआत पटना रिंग रोड के सदिसोपुर से होगी. इसके बाद सोन नदी को पार करते हुए आरा के दक्षिणी हिस्से पातर, गड़हनी, पीरो, बिक्रमगंज और संझौली होते हुए सासाराम के सुअरा तक कॉरिडोर पहुंचेगा. कॉरिडोर का करीब 44 किलोमीटर हिस्सा सदिसोपुर से गड़हनी और करीब 77 किलोमीटर गड़हनी से सासाराम के बीच होगा.
सड़क बनने के बाद क्या बदलेगा?
इस कॉरिडोर के तैयार होने के बाद पटना से पश्चिम बिहार के कई जिलों तक पहुंचना काफी आसान हो जाएगा. भोजपुर और रोहतास के लोगों को पटना और बिहटा एयरपोर्ट तक पहुंचने में भी सुविधा मिलेगी. आरा, सासाराम, दानापुर और पटना के प्रमुख रेलवे स्टेशनों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी. इसके अलावा पटना से वाराणसी, लखनऊ और रांची की यात्रा भी आसान होने की उम्मीद है. दिल्ली-कोलकाता के बीच सड़क संपर्क को भी इससे मजबूती मिलेगी.
माल ढुलाई को भी मिलेगा नया रास्ता
कॉरिडोर का फायदा सिर्फ यात्रियों को नहीं, बल्कि कारोबार और माल परिवहन को भी मिलेगा. इसके बनने से NH-19, NH-319, NH-922, NH-131G और NH-130 जैसे प्रमुख मार्गों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी तैयार होगी. ऐसे में जमीन की अड़चन दूर होते ही यह परियोजना पश्चिम बिहार के लिए सड़क कनेक्टिविटी का बड़ा गेम चेंजर साबित हो सकती है.
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