Bihar Land Mutation: ऑनलाइन दाखिल-खारिज में कौन आगे और कौन पीछे, इन जिलों में रिजेक्शन रेट सबसे ज्यादा

Bihar Land Mutation: बिहार में ऑनलाइन दाखिल-खारिज की प्रक्रिया को लेकर जिलों के प्रदर्शन में बड़ा अंतर सामने आया है. 2026-27 के दौरान लखीसराय, मधेपुरा, वैशाली, सहरसा और गया में आवेदन अस्वीकृत होने की दर ज्यादा रही. पूर्वी चंपारण, जहानाबाद, रोहतास, अरवल और नवादा में रिजेक्शन रेट कम दर्ज किया गया.

Bihar Land Mutation, कृष्ण कुमार: बिहार में ऑनलाइन दाखिल-खारिज की प्रक्रिया के दौरान अलग-अलग जिलों का प्रदर्शन एक जैसा नहीं रहा है. 2026-27 के आंकड़ों में कुछ जिलों में आवेदन अस्वीकृत होने की दर काफी ज्यादा रही. कुछ जिलों ने कम रिजेक्शन के साथ बेहतर प्रदर्शन किया है.

रिजेक्टेड परसेंटेज के आधार पर लखीसराय, मधेपुरा, वैशाली, सहरसा और गया सबसे निचले पायदान पर रहे हैं. इन जिलों में ऑनलाइन दाखिल-खारिज के आवेदनों को रिजेक्ट करने का प्रतिशत दूसरे कई जिलों की तुलना में अधिक पाया गया है.

इन जिलों में प्रदर्शन बेहतर

दूसरी ओर पूर्वी चंपारण, जहानाबाद, रोहतास, अरवल और नवादा में ऑनलाइन दाखिल-खारिज का प्रदर्शन बेहतर रहा है. इन जिलों में आवेदन अस्वीकृत होने का प्रतिशत काफी कम दर्ज किया गया है. इन आंकड़ों से पता चलता है कि ऑनलाइन दाखिल-खारिज की प्रक्रिया को बेहतर तरीके से लागू करने पर आवेदन रिजेक्ट होने की संख्या कम की जा सकती है.

जमीन के रिकॉर्ड में क्यों जरूरी है दाखिल-खारिज

दाखिल-खारिज जमीन के मालिकाना हक में बदलाव को सरकारी जमीन रिकॉर्ड में दर्ज करने की जरूरी प्रक्रिया है. जमीन की खरीद-बिक्री, विरासत या दूसरे कारणों से मालिक बदलने पर रिकॉर्ड में इस बदलाव को दर्ज किया जाता है.

सरकार ने इस प्रक्रिया को ऑनलाइन किया है, ताकि लोगों को जमीन से जुड़ी यह सेवा आसानी से मिल सके. ऑनलाइन व्यवस्था का मकसद प्रक्रिया को आसान, साफ और तय समय में पूरा करना है.

आवेदन रिजेक्ट होने की क्या वजह हो सकती है

दाखिल-खारिज का आवेदन कई कारणों से रिजेक्ट हो सकता है. सबसे आम वजह दस्तावेजों की कमी या उनमें किसी तरह की गलती हो सकती है. इसके अलावा आवेदन में गलत या अधूरी जानकारी देने पर भी आवेदन रिजेक्ट हो सकता है. कई मामलों में जमीन के पुराने रिकॉर्ड और आवेदन में दी गई जानकारी का मिलान नहीं होने से भी परेशानी आती है.

खाता-खेसरा और जमाबंदी में गड़बड़ी भी वजह

जमीन के खाता-खेसरा नंबर या जमाबंदी से जुड़ी जानकारी में अंतर होने पर भी दाखिल-खारिज की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. इसके साथ ही जमीन के मालिकाना हक या विरासत को लेकर विवाद होने पर आवेदन को मंजूरी मिलने में परेशानी हो सकती है. लखीसराय, मधेपुरा, वैशाली, सहरसा और गया में रिजेक्शन रेट ज्यादा रहने के पीछे असल वजह क्या है, यह विभागीय जांच के बाद ही साफ हो पाएगा.

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जमीन मालिकों के लिए जरूरी बात

ऑनलाइन दाखिल-खारिज के लिए आवेदन करते समय जमीन से जुड़े सभी दस्तावेज सही और पूरे रखना जरूरी है. आवेदन में खाता, खेसरा, जमाबंदी और मालिकाना हक से जुड़ी जानकारी भी रिकॉर्ड के अनुसार भरनी चाहिए. अगर दस्तावेज और जमीन के रिकॉर्ड में अंतर है, तो आवेदन अटक सकता है या रिजेक्ट हो सकता है. इसलिए आवेदन करने से पहले सभी जानकारी और दस्तावेजों की अच्छी तरह जांच करना जरूरी है.

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लेखक के बारे में

By परितोष शाही

परितोष शाही डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, सिनेमा और खेल (क्रिकेट) में रुचि रखते हैं.
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