Nepal Flood : नेपाल और हिमालयी क्षेत्रों में हो रही बारिश तथा वहां जारी अलर्ट के बीच बिहार में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है. बिहार सरकार के मंत्री ने कहा कि राज्य की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि नेपाल और हिमालयी क्षेत्र से आने वाले पानी का सीधा असर बिहार के मैदानी इलाकों पर पड़ता है. सरकार पूरी तरह से अलर्ट है और बाढ़ से निपटने के लिए लगातार तैयारियों की समीक्षा की जा रही है.
नेपाल में अलर्ट, बिहार पर सीधा असर
मंत्री ने कहा कि नेपाल में भी अलर्ट की स्थिति है. बिहार हिमालय के तराई क्षेत्र में स्थित है, इसलिए नेपाल और ऊपरी इलाकों में होने वाली बारिश के बाद नदियों में पानी बढ़ने का असर बिहार में देखने को मिलता है. उन्होंने कहा कि बाढ़ बिहार के लिए लंबे समय से बड़ी चुनौती रही है और इससे राज्य को लगातार नुकसान उठाना पड़ता है.
मुख्यमंत्री स्तर पर लगातार हो रही समीक्षा
मंत्री के अनुसार सरकार स्थिति को लेकर पूरी तरह सजग है. जल संसाधन विभाग के अधिकारी लगातार नदियों और जलस्तर की निगरानी कर रहे हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी देर रात तक स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं और अधिकारियों से लगातार जानकारी ले रहे हैं. सरकार का प्रयास है कि मानवीय स्तर पर जो भी जरूरी कदम संभव हैं, उन्हें समय रहते पूरा किया जाए.
बाहर से आने वाले पानी को नियंत्रित करने की तैयारी
मंत्री ने कहा कि बिहार की कई प्रमुख नदियों का उद्गम राज्य के बाहर है. गंडक, कोसी और अन्य नदियों में नेपाल से आने वाले पानी का असर पड़ता है, जबकि सोन नदी का जलग्रहण क्षेत्र उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश तक फैला हुआ है. ऐसे में बाहर से आने वाले पानी के प्रबंधन और नदियों की स्थिति पर जल संसाधन विभाग लगातार नजर रख रहा है.
बाढ़ बिहार के विकास में बड़ी चुनौती
मंत्री ने स्वीकार किया कि बिहार लंबे समय से बाढ़ की समस्या से जूझता रहा है. हर वर्ष बाढ़ से लोगों के जनजीवन, खेती और आधारभूत संरचना पर असर पड़ता है. उन्होंने कहा कि बाढ़ की समस्या बिहार को विकास की राह में पीछे रखने वाली बड़ी चुनौतियों में से एक रही है. सरकार और जल संसाधन विभाग बाढ़ नियंत्रण तथा बचाव की व्यवस्थाओं को लगातार मजबूत करने में जुटे हैं.
प्राकृतिक आपदा पर नियंत्रण संभव नहीं, तैयारी जरूरी
मंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदा को पूरी तरह रोकना किसी के हाथ में नहीं है, लेकिन उसके प्रभाव को कम करने के लिए समय रहते तैयारी की जा सकती है. सरकार का पूरा जोर इसी दिशा में है कि बाढ़ की स्थिति में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और प्रशासनिक स्तर पर किसी तरह की लापरवाही न हो.
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