वृंदावन के कलाकारों ने रासलीला प्रस्तुत कर लोगों को कर दिया मंत्रमुग्ध फोटो कैप्शन- बाल रूप के साथ प्रवचन कर्ता प्रतिनिधि,नारदीगंज प्रखंड क्षेत्र की नारदीगंज पंचायत के पडरिया गांव (बिचली टोला) में आयोजित सात दिवसीय मां सरस्वती प्राण-प्रतिष्ठा यज्ञ के चौथे दिन गुरुवार को वाराणसी के यज्ञाचार्य लवकुश पांडेय व उनके सहयोगी सात ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा-अर्चना करायी. इस दौरान मां सरस्वती की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा करायी गयी. मुख्य यजमान अखिलेश कुमार सुमन व उनकी धर्मपत्नी हेमलता कुमारी सुमन ने विधिवत भूमिका निभायी. कथावाचिका खुशी किशोरी ने यज्ञ के चौथे दिन श्रद्धालुओं को बताया कि आजकल की युवा पीढ़ी अपने धर्म और अपने भगवान को नहीं मानती है. यदि अपने धर्म को जानना है, तो इसके लिए गीता, भागवत और रामायण पढ़ना चाहिए. इन महाग्रंथों के अध्ययन से न केवल आप, बल्कि आपकी आने वाली पीढ़ी भी संस्कारी हो जायेगी.उन्होंने गोवर्धन लीला का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जब ब्रजवासियों ने इंद्र की पूजा छोड़कर गिरिराज गोवर्धन जी की पूजा शुरू की, तो इंद्र ने कुपित होकर ब्रजवासियों पर मूसलाधार बारिश कर दी. तब भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठ अंगुली पर उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की और इंद्र का मान मर्दन किया. इसके बाद इंद्र को भगवान की सत्ता का अहसास हुआ और उन्होंने भगवान से क्षमा मांगी. कथा के दौरान राधे-कृष्ण गोविंद गोपाल, राधे-राधे भजन पर भक्तों ने खूब आनंद लिया. सभी श्रद्धालुओं ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया. इसके बाद वृंदावन के कलाकारों ने उत्कृष्ट रासलीला प्रस्तुत कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया.यज्ञ के साथ श्रीमद्भागवत कथा और रासलीला के आयोजन से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा. श्रद्धालुओं ने श्रद्धा भाव से कथा का श्रवण किया. मौके पर यज्ञ सचिव रंजीत कुमार बौआजी, कोषाध्यक्ष राजेश पंडित, निखिल ज्योति, व्यापार मंडल अध्यक्ष विपिन कुमार, अलखदेव प्रसाद, विजय सिंह समेत काफी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
