Nawada News : नवादा सदर प्रखंड के रतोई गांव स्थित उपस्वास्थ्य केंद्र की बदहाल स्थिति ने ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिये हैं. ग्रामीणों के अनुसार, करीब दो वर्षों से बंद पड़े उपस्वास्थ्य केंद्र का ताला खुलने के बाद अंदर बड़ी संख्या में सरकारी दवाएं, सिरप की बोतलें और गोलियों के पत्ते पड़े मिले. ग्रामीणों का दावा है कि इनमें कई दवाएं एक्सपायर हो चुकी हैं. लंबे समय से बंद कमरे में पड़ी दवाएं धूल और मकड़ी के जाल से ढकी नजर आयीं.
ग्रामीणों का कहना है कि उपस्वास्थ्य केंद्र लंबे समय से बंद रहने के कारण गांव के गरीब और जरूरतमंद मरीजों को स्थानीय स्तर पर इलाज और मुफ्त दवा की सुविधा नहीं मिल पा रही थी. दूसरी ओर, मरीजों के इलाज के लिए उपलब्ध करायी गयी सरकारी दवाएं केंद्र के अंदर पड़ी-पड़ी बेकार हो गयीं. ग्रामीणों ने केंद्र के अंदर की स्थिति का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया और मीडिया के माध्यम से मामला सामने लाया है.
दवाओं की आपूर्ति हुई तो वितरण क्यों नहीं
मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं. ग्रामीणों का सवाल है कि यदि उपस्वास्थ्य केंद्र करीब दो वर्षों से बंद था, तो वहां सरकारी दवाओं की आपूर्ति किस आधार पर होती रही. दवाओं के स्टॉक, एक्सपायरी डेट और वितरण की नियमित निगरानी किस स्तर पर की जा रही थी.
वहीं, यदि केंद्र चालू था, तो ग्रामीणों को नियमित रूप से इलाज और दवाओं का लाभ क्यों नहीं मिला. ग्रामीणों का आरोप है कि स्वास्थ्य केंद्र की नियमित निगरानी नहीं होने के कारण सरकारी संसाधनों की बर्बादी हुई. उनका कहना है कि गरीब मरीजों के लिए उपलब्ध करायी गयी दवाओं का समय पर वितरण होता, तो जरूरतमंदों को इसका लाभ मिल सकता था.
स्टॉक और दवाओं की एक्सपायरी की जांच की मांग
ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है. उनका कहना है कि उपस्वास्थ्य केंद्र में उपलब्ध दवाओं के स्टॉक रजिस्टर, आपूर्ति, वितरण, एक्सपायरी और भंडारण की जांच करायी जानी चाहिए. साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि केंद्र कितने समय से बंद था और इसकी जानकारी विभागीय अधिकारियों को थी या नहीं.
जांच के बाद स्पष्ट होगी जिम्मेदारी
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि मरीजों के इलाज के लिए उपलब्ध करायी गयी सरकारी दवाएं मरीजों तक पहुंचने से पहले ही एक्सपायर कैसे हो गयीं. करीब दो वर्षों तक उपस्वास्थ्य केंद्र बंद रहने की ग्रामीणों की बात सही है, तो विभागीय निगरानी तंत्र को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई. हालांकि, दवाओं की वास्तविक स्थिति, स्टॉक और केंद्र के संचालन से जुड़ी पूरी तस्वीर जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी.
