Jal Satyagraha: बिहार राज्य मत्स्यजीवी सहकारी संघ लिमिटेड (कॉफेड) की ओर से मछुआरा समितियों के हितों से जुड़ी मांगों को लेकर रविवार को नवादा के कौआकोल प्रखंड स्थित शिबपुर जलाशय पर जल सत्याग्रह किया जायेगा. कॉफेड के निदेशक राकेश कुमार ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कार्यक्रम की जानकारी दी है.
खुली डाक से जलाशयों की बंदोबस्ती का विरोध
कॉफेड का आरोप है कि जल संसाधन विभाग तथा डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग, बिहार सरकार से कई बार आग्रह किये जाने के बावजूद मछुआरों के हितों की अनदेखी की जा रही है. संगठन का कहना है कि सरकारी नियमों के विपरीत राज्य के जलाशयों की बंदोबस्ती खुली डाक के माध्यम से की जा रही है.
कॉफेड ने इसी के विरोध में बिहार में जल सत्याग्रह आंदोलन चलाने का निर्णय लिया है. संगठन के अनुसार, यह मामला गरीब मछुआरा परिवारों की आजीविका से सीधे जुड़ा हुआ है.
जलकर प्रबंधन अधिनियम का हवाला
कॉफेड की ओर से जारी विज्ञप्ति में बिहार जलकर प्रबंधन अधिनियम का हवाला देते हुए कहा गया है कि जलाशयों की बंदोबस्ती प्रखंड स्तरीय मत्स्यजीवी सहयोग समितियों के साथ करने का प्रावधान है. संगठन का आरोप है कि इसके बावजूद जलाशयों, तालाबों और सदाबहार नदियों की बंदोबस्ती खुली डाक से की जा रही है.
विज्ञप्ति में नवादा के शिबपुर समेत सात जलाशयों की बंदोबस्ती खुली निविदा के माध्यम से किये जाने का उल्लेख किया गया है. कॉफेड ने इसे मछुआरा समुदाय की आजीविका से जुड़ा महत्वपूर्ण मामला बताते हुए सरकार से नियमों के अनुसार कार्रवाई की मांग की है.
मत्स्यजीवी समितियों के साथ बंदोबस्ती की मांग
कॉफेड ने सरकार से मांग की है कि जल से संबंधित सभी जलाशयों की बंदोबस्ती मत्स्यजीवी सहयोग समितियों के साथ की जाये. संगठन का कहना है कि इससे पारंपरिक रूप से मछली पालन पर निर्भर गरीब मछुआरा परिवारों की आजीविका सुरक्षित हो सकेगी.
ये पदाधिकारी होंगे शामिल
जल सत्याग्रह कार्यक्रम में कॉफेड के प्रबंध निदेशक प्रदीप कुमार, अध्यक्ष प्रयाग सहनी और नवादा जिलाध्यक्ष विद्यासागर केवट मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगे. कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉफेड के निदेशक राकेश कुमार करेंगे.
