प्रभात खबर इम्पैक्ट: रजौली अस्पताल में एक्सपायर्ड दवा बांटने पर पटना तक हड़कंप, राज्य स्वास्थ्य समिति ने 2 दिन में मांगी रिपोर्ट

Rajauli Hospital News: 'प्रभात खबर' की खबर का जोरदार असर. रजौली अनुमंडलीय अस्पताल में मरीज को एक्सपायर्ड सिरप देने के मामले में राज्य स्वास्थ्य समिति सख्त. कार्यपालक निदेशक अमित कुमार पांडेय ने सिविल सर्जन से मांगा स्पष्टीकरण. पूरी रिपोर्ट पढ़ें.

Rajauli Hospital News (कुमार मनीष देव): बिहार के नवादा जिले के रजौली अनुमंडलीय अस्पताल में स्वास्थ्यकर्मियों की घोर लापरवाही और संवेदनहीनता को लेकर ‘प्रभात खबर’ में प्रकाशित समाचार का राज्य स्तर पर बहुत बड़ा और त्वरित असर हुआ है. 75 शैय्या वाले इस अस्पताल में एक बीमार महिला मरीज को दो महीने पहले एक्सपायर हो चुकी दवा थमा देने और विरोध करने पर बिना दवा दिए भगा देने के सनसनीखेज मामले को राज्य स्वास्थ्य समिति (बिहार) ने अत्यंत गंभीरता से लिया है. खबर छपने के बाद महकमे में हड़कंप मच गया है, और पटना मुख्यालय के निर्देश पर अब दोषी अधिकारियों व कर्मियों की बर्खास्तगी और निलंबन की उल्टी गिनती शुरू हो गई है.

क्या था पूरा मामला, जिसका ‘प्रभात खबर’ ने किया था पर्दाफाश?

मालूम हो कि ‘प्रभात खबर’ के मंगलवार, 2 जून 2026 के नवादा संस्करण में ‘बीमार महिला को अस्पताल कर्मी ने थमा दिया एक्सपायर्ड सिरप’ शीर्षक से इस खबर को प्रमुखता से उजागर किया गया था. सोमवार, 1 जून को महसई निवासी अरुण सिंह की बीमार पत्नी राधा देवी अपने बेटे रोहित सिंह के साथ ओपीडी में डॉक्टर श्यामनंदन प्रसाद से इलाज कराने पहुंची थीं. डॉक्टर ने जो मूल दवा ‘ब्रोमोहेक्सिन हाइड्रोक्लोराइड’ पर्चे पर लिखी थी, दवा काउंटर पर मौजूद फार्मासिस्ट ने उसके बदले मरीज को दो महीने पहले यानी अप्रैल 2026 में ही एक्सपायर हो चुकी ‘डाईएथिल बेमाजीन साइट्रेट’ सिरप थमा दी. जब सतर्क बेटे ने एक्सपायरी डेट (04/2026) देखकर इस पर आपत्ति जताई, तो फार्मासिस्ट ने न सिर्फ सिरप वापस रख ली, बल्कि पर्चे से मूल दवा का नाम काटकर कह दिया कि दवा स्टॉक में नहीं है. इसके बाद बीमार महिला को बिना कोई दूसरी दवा दिए वहां से डांटकर भगा दिया गया, जिसके बाद पीड़ित परिवार को महंगे खर्च पर निजी डॉक्टर के पास जाना पड़ा.

राज्य स्वास्थ्य समिति ने कहा ‘अत्यंत गंभीर लापरवाही, मरीजों की जान से खिलवाड़ मंजूर नहीं’

इस अमानवीय घटना की रिपोर्ट जैसे ही उच्चाधिकारियों तक पहुंची, राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक अमित कुमार पांडेय एक्शन में आ गए. उन्होंने नवादा सिविल सर्जन को जारी किए गए अपने ज्ञापांक, SHSB/PM/567/2020/1294, दिनांक 04/06/2026 के माध्यम से इस पूरे कृत्य को घोर आपत्तिजनक करार दिया है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी परिस्थिति में एक्सपायर्ड दवाओं का वितरण पूरी तरह प्रतिबंधित है और यह सरकारी नियमों का खुला उल्लंघन है. इससे मरीजों की जान को सीधे तौर पर खतरा हो सकता है.

2 दिनों के भीतर आरोप गठित कर मांगी रिपोर्ट, नपेंगे अस्पताल के कई बड़े चेहरे

कार्यपालक निदेशक ने नवादा सिविल सर्जन को सख्त लहजे में निर्देश दिया है कि इस पूरे मामले की अविलंब उच्चस्तरीय जांच की जाए. इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अस्पताल के उपाधीक्षक (DS), प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, अस्पताल प्रबंधक (Hospital Manager), दोषी फार्मासिस्ट और स्टोरकीपर की सीधी जवाबदेही तय की जाए. आदेश के मुताबिक, अगले दो दिनों के भीतर इन सभी दोषियों के खिलाफ नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए आरोप पत्र गठित कर राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार को सूचित करना अनिवार्य है.

गौरतलब है कि स्वास्थ्य विभाग के आदेश ज्ञापांक 3378 (दिनांक 01.09.2023) के तहत एक्सपायर्ड दवाओं के सुरक्षित निष्पादन के कड़े नियम हैं, लेकिन रजौली अस्पताल में इन नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं. स्थानीय लोगों का कहना है कि रोगी कल्याण समिति की निष्क्रियता के कारण यहाँ अक्सर मरीजों से दुर्व्यवहार होता है. बहरहाल, ‘प्रभात खबर’ की इस जनसरोकार वाली मुहिम के बाद अब दोषियों पर गाज गिरना पूरी तरह तय माना जा रहा है.

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Published by: Aditya Kumar Ravi

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