जिले में तेज रफ्तार वाहनों का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है. हिसुआ थाना क्षेत्र में मंगलवार को हुए सड़क हादसे में महिला कॉलेज के प्रोफेसर अरविंद कुमार की मौत हो गई. हादसे के बाद वाहन चालक मौके से फरार हो गया. घटना की खबर मिलते ही परिजनों और स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया.
बताया जाता है कि प्रोफेसर अरविंद कुमार किसी काम से दुकान की ओर जा रहे थे. इसी दौरान तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी. हादसे में वे गंभीर रूप से घायल हो गए. स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
पोस्टमार्टम के बाद शव पहुंचते ही भड़का आक्रोश
पोस्टमार्टम के बाद जब मृतक का शव हिसुआ चौक पहुंचा तो परिजनों और स्थानीय लोगों का आक्रोश फूट पड़ा. लोगों ने शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया. इसके कारण गया-राजगीर-नवादा मुख्य मार्ग पर यातायात पूरी तरह बाधित हो गया. सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और राहगीरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा.
प्रदर्शन कर रहे लोगों ने पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए फरार वाहन और चालक की जल्द पहचान कर गिरफ्तारी की मांग की. लोगों का कहना था कि क्षेत्र में लगातार तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाए जा रहे हैं, जिससे आए दिन सड़क हादसे हो रहे हैं.
स्पीड ब्रेकर और बैरिकेडिंग की मांग
स्थानीय लोगों ने दुर्घटना संभावित स्थानों पर स्पीड ब्रेकर, बैरिकेडिंग और प्रभावी यातायात व्यवस्था लागू करने की मांग की. उनका कहना था कि भीड़भाड़ वाले इलाकों में वाहनों की रफ्तार नियंत्रित नहीं होने के कारण हादसों का खतरा बना रहता है.
जाम की सूचना पर स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाने का प्रयास किया. अधिकारियों ने फरार वाहन चालक की पहचान कर कार्रवाई करने, परिजनों को नियमानुसार सहायता दिलाने तथा यातायात व्यवस्था में सुधार का आश्वासन दिया. इसके बाद लोगों ने सड़क जाम समाप्त किया. पुलिस ने फरार वाहन की पहचान के लिए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. मामले की जांच जारी है.
कब रुकेगा हादसों का सिलसिला
जिला प्रशासन की वेबसाइट के अनुसार नवादा में कई राष्ट्रीय और राज्य राजमार्ग गुजरते हैं, जिससे सड़क सुरक्षा व्यवस्था का महत्व और बढ़ जाती है. जिले में कई प्रमुख चौक-चौराहों पर इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लगाने की योजना भी सामने आ चुकी है. ऐसे में सवाल यह है कि तकनीक और योजनाएं जमीन पर कितनी प्रभावी साबित हो रही हैं.
