Nawada News(बब्लू कुमार): बिहार में पड़ रही भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच नवादा का सुप्रसिद्ध पर्यटन स्थल ककोलत जलप्रपात (Kakolat Waterfall) एक बार फिर सैलानियों से गुलजार हो उठा है. लेकिन इस बार ककोलत की तस्वीर पहले से काफी बदली-बदली और अनुशासित नजर आई. अमूमन जहाँ पहले ककोलत में घंटों लंबी कतारें, भारी अव्यवस्था और धक्का-मुक्की पर्यटकों के लिए सिरदर्द बनती थी, वहीं अब जिला प्रशासन द्वारा लागू की गई नई व्यवस्था ने पर्यटकों को बहुत बड़ी राहत दी है.
नई टिकट व्यवस्था और पार्किंग शुल्क लागू, 7000 सैलानियों की उमड़ी भीड़
ककोलत जलप्रपात के बेहतर प्रबंधन को लेकर जिला प्रशासन द्वारा 21 मई (गुरुवार) से ही संशोधित प्रवेश और पार्किंग शुल्क की नई व्यवस्था लागू की गई थी. हालांकि, इस नए नियम के बाद भी पर्यटकों के उत्साह में कोई कमी नहीं देखी गई. गुरुवार को टिकट काउंटर बंद होने तक कुल 6,900 टिकटों की बिक्री हुई. बच्चों को मिलाकर करीब 7,000 पर्यटक जलप्रपात का आनंद लेने पहुंचे. प्रशासन द्वारा ककोलत में प्रतिदिन अधिकतम 8,000 पर्यटकों के ही प्रवेश की सीमा तय की गई है. इस फैसले के कारण पूरे दिन परिसर में भीड़ पूरी तरह नियंत्रित और व्यवस्थित रही.
प्रशासन के इन 5 कड़े कदमों से पर्यटकों को मिली राहत
ककोलत में आने वाले सैलानियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने इस बार जमीन पर व्यापक सुधार किए हैं. मुख्य कुंड क्षेत्र में एक बार में सीमित संख्या में ही लोगों को जाने की अनुमति दी जा रही है. कुंड में स्नान और रुकने की समय-सीमा तय कर दी गई है ताकि बाकी पर्यटकों को भी मौका मिल सके. साथ ही वाहनों के रखरखाव के लिए पार्किंग व्यवस्था को पूरी तरह व्यवस्थित किया गया है.वहीं असामाजिक तत्वों पर नजर रखने और महिलाओं की सुरक्षा के लिए सुरक्षाबलों की तैनाती बढ़ाई गई है. कचरा प्रबंधन और स्वच्छता के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं.
देश-दुनिया से आए पर्यटकों ने जताया आभार; कहा- “इस बार सुरक्षित लगा माहौल”
ककोलत की इस बदली व्यवस्था को लेकर विभिन्न जिलों से आए पर्यटकों ने अपनी प्रतिक्रिया दी और नवादा प्रशासन की सराहना की:
गया से आए पर्यटक रवि कुमार ने कहा कि पहले यहाँ इतनी बेकाबू भीड़ रहती थी कि मुख्य कुंड के पानी तक पहुँचना भी मुश्किल हो जाता था. इस बार व्यवस्था काफी बेहतर और सुकून देने वाली लगी.
पर्यटक नेहा कुमारी ने बताया कि महिलाओं और बच्चों के लिए इस बार ककोलत का माहौल ज्यादा सुरक्षित और सुविधाजनक लगा. भीड़ का कंट्रोल वाकई काबिलेतारीफ था.
पटना से आए पर्यटक आदित्य ने भी बताया कि नई टिकट और शुल्क व्यवस्था के बावजूद ककोलत में लोगों का ऐसा भारी उत्साह देखकर समझ आता है कि इस प्राकृतिक जलप्रपात का क्रेज आज भी बरकरार है.
सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण सर्वोपरि: प्रशासन
स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि ककोलत केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि एक संवेदनशील प्राकृतिक धरोहर भी है. पर्यटकों की सुरक्षा, उनकी बेहतर सुविधा और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए आगे भी इसी तरह नियंत्रित और नियमबद्ध व्यवस्था जारी रखी जाएगी, ताकि लोग बिना किसी परेशानी के ककोलत के प्राकृतिक सौंदर्य का लुत्फ उठा सकें.
