रजौली नगर पंचायत की सफाई व्यवस्था बेपटरी, 11 माह से संवेदक का भुगतान बकाया

सरकार भले ही स्वच्छता को लेकर बड़े-बड़े दावे करे और विज्ञापनों पर पानी की तरह पैसा बहाए, लेकिन धरातल पर प्रशासनिक अधिकारियों की घोर लापरवाही और संवेदनहीनता इन दावों की पोल खोल रही है.

वेतन नहीं मिलने से सफाइकर्मियों के सामने भुखमरी की नौबत, प्रशासन की लापरवाही उजागर

फाइलों के फेर में फंसी कर्मियों की मजदूरी, कर्ज के दलदल में डूबे संवेदक

प्रतिनिधि, रजौली

सरकार भले ही स्वच्छता को लेकर बड़े-बड़े दावे करे और विज्ञापनों पर पानी की तरह पैसा बहाए, लेकिन धरातल पर प्रशासनिक अधिकारियों की घोर लापरवाही और संवेदनहीनता इन दावों की पोल खोल रही है. रजौली नगर पंचायत में प्रशासनिक शिथिलता का एक ऐसा ही गंभीर मामला सामने आया है, जिसने न सिर्फ पूरे शहर की सफाई व्यवस्था को चरमराने के कगार पर ला खड़ा किया है, बल्कि व्यवस्था को सुचारू रखने वाले सफाईकर्मियों और संवेदक को दाने-दाने को मोहताज कर दिया है. नगर पंचायत में कार्यरत सफाई ठेकेदार ”जय भोले इंटरप्राइजेज” (एनजीओ) को पिछले 11 महीनों से उनके द्वारा किये गये कार्यों की राशि का भुगतान नहीं किया गया है, जिससे स्थिति बेहद विकट हो चुकी है.

फाइलों के फेर में फंसा स्वच्छता का बजट

इस अप्रत्याशित वित्तीय संकट का सबसे क्रूर और सीधा असर उन गरीब सफाइकर्मियों पर पड़ रहा है, जो हर दिन शहर को साफ-सुथरा रखने के लिए अपना पसीना बहाते हैं. संवेदक को समय पर राशि न मिलने के कारण इन कर्मियों को नियमित मानदेय नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनके सामने परिवार के भरण-पोषण का गंभीर संकट खड़ा हो गया है. प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली इस कदर संवेदनहीन हो चुकी है कि कभी सफाई कार्य से संबंधित जरूरी पीएफ की राशि समय पर उपलब्ध नहीं करायी जाती, तो कभी आवंटित होने वाले मानदेय को फाइलों के फेर में अटका कर रख दिया जाता है. इस लगातार हो रही देरी और अनिश्चितता से तंग आकर जब बेबस सफाइकर्मियों के सामने भुखमरी की नौबत आती है, तो वे मजबूरन काम बंद कर हड़ताल पर जाने को विवश होते हैं.

मानवीय संवेदनाओं के सहारे खिंच रही व्यवस्था

ऐसी विकट परिस्थितियों में भी शहर को गंदगी के ढेर में तब्दील होने से बचाने और मानवीय संवेदनाओं को सर्वोपरि रखते हुए संवेदक अपनी जेब से और दूसरों से भारी ब्याज पर कर्ज लेकर सफाइकर्मियों को मानदेय का भुगतान करते आ रहे हैं, ताकि उनके घरों का चूल्हा जलता रहे. हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों की इस चरम शिथिलता और लालफीताशाही ने अब संवेदक को भी पूरी तरह से आर्थिक रूप से लाचार और कर्ज के दलदल में धकेल दिया है. अब इस पूरी व्यवस्था को निजी स्तर पर संभालना और भारी-भरकम कर्ज का बोझ उठाना संवेदक के लिए पूरी तरह नामुमकिन होता जा रहा है, जिससे स्थानीय जनता में भी प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश पनप रहा है.

16 महीने का काम पूरा, पर 11 महीने की राशि बकाया

सफाई एनजीओ ”जय भोले इंटरप्राइजेज” के संवेदक संदीप कुमार को नगर पंचायत में दो साल के एग्रीमेंट पर कार्य कराने का कार्यादेश प्राप्त हुआ था. वर्तमान में संवेदक द्वारा करीब 16 महीने का कार्य पूरा होने को है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन ने उन्हें पिछले 11 महीनों की राशि का भुगतान नहीं किया है. इस भारी बकाये के कारण रोजाना मजदूरों की मजदूरी देने और सफाई उपकरणों के रख-रखाव में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. संवेदक अब पूरी तरह से लाचार हो चुके हैं और पूरी व्यवस्था किसी भी वक्त पूरी तरह ठप हो सकती है.

आवंटन का रोना रो रहा प्रशासन

इस पूरे मामले पर जब नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी आतीष कुमार से बात की गयी, तो उन्होंने अपनी लाचारी व्यक्त करते हुए बताया कि विभाग में राशि उपलब्ध नहीं होने के कारण ही संवेदक का भुगतान बाधित चल रहा है. उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि कार्यालय स्तर से संबंधित संचिका विभाग को मार्गदर्शन और आवंटन के लिए भेज दी गयी है. जैसे ही विभाग के द्वारा राशि का आवंटन प्राप्त होगा, संवेदक के बकाये भुगतान की प्रक्रिया तुरंत पूरी कर दी जायेगी. बहरहाल, अधिकारियों के इस रटे-रटाये जवाब के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब तक विभाग से राशि आयेगी, तब तक कर्ज में डूबे संवेदक और भुखमरी झेल रहे सफाईकर्मियों के सब्र का बांध टूट चुका होगा.

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Author: KR MANISH DEV

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