Nawada News : नवादा सदर प्रखंड के मधुबन और मोतनाजे गांवों में गंगा उद्धव योजना के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण के विरोध में किसानों का आंदोलन तेज हो गया है. ग्रामीणों के अनुसार, योजना के लिए दोनों गांवों की करीब एक हजार बीघा जमीन अधिग्रहित किये जाने की बात सामने आ रही है. इससे खेती पर निर्भर करीब तीन हजार परिवार प्रभावित हो सकते हैं.
जमीन और आजीविका बचाने की मांग को लेकर गुरुवार को मधुबन-मोतनाजे क्षेत्र में किसान महापंचायत आयोजित की गयी. इसमें बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण शामिल हुए तथा भूमि अधिग्रहण के विरोध में अपनी आवाज बुलंद की.
उपजाऊ जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पर पुनर्विचार की मांग
महापंचायत में किसानों ने कहा कि उनकी जमीन पीढ़ियों से परिवार की आजीविका का आधार रही है. इसी उपजाऊ कृषि भूमि पर खेती कर परिवारों का भरण-पोषण होता है. ऐसे में जमीन अधिग्रहित होने पर उनके सामने रोजगार और आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो जायेगा.
किसानों ने कहा कि वे विकास योजनाओं के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर उपजाऊ कृषि भूमि से उन्हें बेदखल करना स्वीकार नहीं किया जायेगा. उन्होंने सरकार और प्रशासन से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर तत्काल पुनर्विचार करने की मांग की.
किसानों की सहमति और संवाद के बाद ही आगे बढ़े प्रक्रिया
किसानों ने प्रभावित परिवारों की सहमति लेने, उनकी जमीन और आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा पूरे मामले में ग्रामीणों के साथ संवाद कर समाधान निकालने की मांग की. उनका कहना था कि योजना को लेकर प्रभावित परिवारों की आपत्तियों और आशंकाओं को पहले सुना जाना चाहिए.
राजेंद्र सिंह ने किसानों के अधिकारों की रक्षा की बात कही
महापंचायत को संबोधित करते हुए जल संरक्षण विशेषज्ञ राजेंद्र सिंह ने किसानों के अधिकारों की रक्षा की बात कही. उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी भूमि से बेदखल करना उचित नहीं है. किसी भी विकास योजना को आगे बढ़ाने से पहले किसानों के हितों और उनकी सहमति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए.
उन्होंने कहा कि विकास और किसानों के हितों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है. प्रभावित ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए.
किसानों की समस्याओं की अनदेखी नहीं करने की अपील
कार्यक्रम में अबुलास अहमद, बक्सर के सांसद सुधाकर सिंह, भारतीय किसान संघ के बिहार अध्यक्ष दिनेश सिंह तथा बिहार राज्य दुग्ध उत्पादक संघ के अध्यक्ष अशोक कुमार सिंह, गोविंदपुर समेत अन्य लोग मौजूद रहे. वक्ताओं ने किसानों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि किसी भी विकास योजना की सफलता के लिए प्रभावित लोगों का विश्वास जरूरी है. किसानों की समस्याओं की अनदेखी कर योजना को आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा.
वक्ताओं ने ग्रामीणों से लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को रखने और एकजुट होकर आंदोलन जारी रखने की अपील की. महापंचायत में किसानों ने भी कहा कि वे अपनी जमीन और अधिकारों की रक्षा के लिए पीछे नहीं हटेंगे.
Also Read : एक हफ्ते बाद शांत हुई गंगा जी, जलस्तर में मामूली गिरावट से बक्सर में बाढ़ प्रभावित इलाकों को राहत
किसानों में आक्रोश, बोले - जमीन गयी तो आजीविका का क्या होगा
महापंचायत के दौरान किसानों में भूमि अधिग्रहण को लेकर आक्रोश और चिंता साफ दिखी. ग्रामीणों ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी मांग कृषि भूमि को अधिग्रहण से बचाना और प्रभावित परिवारों के हितों की रक्षा करना है. किसानों ने कहा कि जमीन ही उनकी पूंजी और रोजगार है. जमीन चली गयी तो खेती पर निर्भर परिवारों के सामने भविष्य का संकट खड़ा हो जायेगा.
किसानों ने सरकार और प्रशासन से जल्द पहल कर ग्रामीणों के साथ बातचीत करने तथा उनकी मांगों पर उचित निर्णय लेने की मांग की. साथ ही स्पष्ट किया कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक भूमि अधिग्रहण के विरोध में आंदोलन जारी रहेगा. महापंचायत में किसानों ने एक स्वर में कहा, "चाहे जो हो जाये, हम अपनी जमीन नहीं छोड़ेंगे."
Also Read : राजपुर में 107.6 लीटर देशी शराब बरामद, पुलिस को देख बाइक छोड़ भागा तस्कर
