नारदीगंज के कुख्यात अपराधियों पर जिला प्रशासन ने लगाया सीसीए

एसपी-डीएम द्वारा भेजे गये सीसीए प्रस्ताव को हाइकोर्ट ने दी मंजूरी

नवादा कार्यालय. बढ़ते अपराध और अपराधियों पर अंकुश लगाने की दिशा में बिहार सरकार से फरवरी 2024 में अपराध नियंत्रण अधिनियम को लेकर सीसीए 12 (2) की मंजूरी मिलने के बाद जिला प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है. एसपी अभिनव धीमान व जिलाधिकारी सह जिला दंडाधिकारी रवि प्रकाश ने संभवतः पहली मर्तवा बिहार सरकार के अपराध नियंत्रण अधिनियम 2024 12(2) नये कानून का प्रयोग कर कुख्यात अपराधियों पर शिकंजा कसते हुए सख्ती बढ़ा निरुद्ध किया है. कारवाई से जुड़ी जानकारी जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय, नवादा द्वारा प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी गयी है. दरअसल पूरा मामला जिले के नारदीगंज थाना क्षेत्र से जुड़ा है. नारदीगंज थाना क्षेत्र का कुख्यात अपराधी सुनील यादव व उसके गुर्गों के खिलाफ नवादा जिला प्रशासन ने सख्ती बढ़ाते हुए उच्च न्यायालय पटना को प्रस्ताव भेजा था. पुलिस अधीक्षक नवादा व जिला दंडाधिकारी नवादा द्वारा दिये गये जिरह और पर्याप्त साक्ष्यों को देखते हुए उच्च न्यायलय ने कुख्यात पिता-पुत्र को छह महीने तक निरुद्ध करने का आदेश पारित किया है. फिलहाल दोनों कुख्यात पिता-पुत्र मंडलकारा नवादा में विचाराधीन बंदी के रूप में कैद है. नारदीगंज के पड़रिया का पूरा मामला इसी वर्ष फरवरी महीने में नारदीगंज थाना क्षेत्र स्थित पड़रिया गांव में कुख्यात अपराधी सुनील यादव, सुशील यादव अपने गुर्गों के साथ पड़रिया गांव के ही एक कमजोर ब्राह्मण परिवार की जमीन कब्जा करने के उद्देश्य से देर रात पीड़िता के घर में घुस कर मारपीट की गयी. इसके बाद महिला से अभद्र व्यवहार किया गया. इसके बाद विभिन्न पार्टियों के नेताओं ने पीड़िता व उसके परिजनों से मुलाकात की. वहीं, घटना में संलिप्त आरोपितों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने की मांग की थी. साथ ही पीड़िता और उसके परिजनों के अलावा कांड के अन्य गवाहों को कुख्यात अपराधियों से सुरक्षा की मांग भी की थी. घटना के बाद नारदीगंज पुलिस ने कांड संख्या 75/25 दर्ज कर घटना में शामिल कुख्यात सुनील यादव और पिंटू यादव को दबोच कर गिरफ्तार कर लिया. घटना की गंभीरता देखते हुए एसपी अभिनव धीमान के निर्देश पर एसआइटी का गठन कर शेष फरार अभियुक्त की गिरफ्तारी को निर्देशित किया गया था. फलस्वरूप घटना कारीत करने के सप्ताह भर के अंदर ही पुलिस ने कुख्यात पुत्र सुशील यादव, सत्यम कुमार सहित दो विधि विरुद्ध बालक को निरुद्ध कर लिया गया था. आपराधिक प्रवृत्ति का रहा है पिता-पुत्र नारदीगंज कांड के बाद नवादा पुलिस ने भी अपने छानबीन के दौरान माना की सुनील यादव और उसका पुत्र सुशील यादव आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति है. जिले के नारदीगंज थाना क्षेत्र स्थित अब्दलपुर पड़रिया गांव निवासी कुख्यात सुनील यादव और उसके पुत्र सुशील यादव के खिलाफ नारदीगंज थाना में 10-10 कांड दर्ज हैं. इसमे करीब सात कांड 38/20, 177/20, 180/20, 70/21, 368/24,32/25 और 75/25 ऐसे पाये गये हैं. इसमें पिता-पुत्र ने मिलकर संयुक्त रूप से घटना को अंजाम दिया. इसके अलावा कांड संख्या 80/14, 101/15 और 113/19 को अंजाम देने में कुख्यात सुनील यादव ने अपने पुत्र का सहयोग नहीं किया. वहीं, कांड संख्या 12/22, 264/22 और 192/24 में पुत्र सुशील यादव ने पिता के साथ अपराध में भागीदारी नहीं निभाया. गौरतलब है की नारदीगंज पुलिस सुशील यादव के खिलाफ दर्ज मामलों की फेहरिस्त में शामिल कांड संख्या 38/20, 177/20, 180/20,70/21 और 264/22 में आरोप पत्र भी दाखिल कर चुकी है. क्या है बिहार अपराध नियंत्रण 12 (2) राज्य में बढ़ते अपराध और भ्रष्टाचार को काबू में करने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई वाली एनडीए सरकार ने मार्च 2024 में बिहार अपराध नियंत्रण विधेयक 2024 को सदन में मंजूरी दी थी. इस विधेयक के पास होने के बाद बालू, शराब और भू-माफियाओं सहित आर्थिक अपराधों में संलिप्त माफियाओं, मानव तस्कर, देह व्यापार, छेड़खानी, दंगा फैलाने वाले सोशल मीडिया का दुरुपयोग सहित अन्य कांडों में शामिल अपराधी और आपराधिक गिरोहों पर कानूनी शिकंजा कसने को लेकर जिला के डीएम और एसपी को विशेष अधिकार प्रदान किया गया. अपराधियों को तड़ीपार भी कर पायेंगे डीएम बिहार सरकार द्वारा इन अपराधों पर नियंत्रण के लिए जिले के डीएम और एसपी को असीमित शक्ति प्रदान की गयी है. इसमें जिलाधिकारी को वारंट जारी करने, गिरफ्तार करने, जेल भेजने, बेल देने का अधिकार सहित आपराधिक मामलों में शामिल तत्वों को 6 महीना व जिला एवं राज्यों से तड़ीपार करने का भी अधिकार प्रदान की गयी है. डीएम के फैसलों पर अपील का प्रावधान हालांकि, डीएम के आदेश के खिलाफ प्रमंडल आयुक्त के समक्ष अपील की जा सकेगी. डीएम को कार्रवाई करने की सूचना राज्य सरकार को पांच दिनों के अंदर देनी होगी. वहीं, 12 दिनों के अंदर सरकार से अनुमति भी लेनी होगी. दो साल में दो आपराधिक मामलों में अगर पुलिस न्यायालय में किसी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करती है, तो उसे असामाजिक तत्व की श्रेणी में माना जायेगा.

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Author: PANCHDEV KUMAR

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