बदइंतजामी. सरकंडा के गांवों में छह माह पहले हुई थी पहल, अधर में लटकी प्रक्रिया
सरकंडा पंचायत के कई गांवों में शाम होते ही छा जाता है अंधेरा
गोविंदपुर : सरकंडा पंचायत के दर्जनों गांवों में बिजली नहीं है. ग्रामीणों ने बताया कि तीन चार साल पहले बिजली के खंभे गाड़े गये थे. अब तक किसी भी गांव में बिजली की रोशनी नहीं पहुंची.
इसको लेकर ग्रामीणों ने विधायक व विभागीय अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा है. बावजूद सकारात्मक पहल नहीं की गयी. लोगों का कहना है कि बिजली नहीं रहने के कारण लोगों का जीवन अंधेरे में कट रहा है. शाम होते ही गलियों में सन्नाटा व अंधेरा पसर जाता है. जरूरी काम से घरों से निकलने में भी लोग एक बार सोचते हैं. रात में सांप-बिच्छू आदि का डर भी सताता है. इस बाबत पंचायत प्रतिनिधियों व विधायक भी ध्यान नहीं देते. ग्रामीणों की बातों को अनसुना कर दिया जा रहा है. सरकार की घोषणा के मुताबिक तमाम गांवों को बिजली की रोशनी से रोशन करना है. बावजूद सरकंडा पंचायत के गांवों पर लोगों का ध्यान नहीं जाता.
बच्चों की पढ़ाई हो रही बाधित
गांवों में बिजली नहीं रहने से बच्चों की पढ़ाई भी नहीं हो पाती. सुबह होते ही बच्चे बदन जलानेवाली धूप में स्कूल से लौटते हैं. इसके बाद भीषण गरमी के कारण घर में पढ़ाई नहीं हो पाती. स्कूल में पढ़ाये गये विषयों का रिवीजन भी नहीं हो पाता. बच्चे समय से होमवर्क भी नहीं कर पाते. इसके चलते उन्हें क्लास में शिक्षकों की फटकार सुननी पड़ती है. वर्तमान समय चुनौतियों से भरा है. ऐसे में बच्चों को शिक्षा से दूर रखना देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ है. इस तरफ भी बिजली विभाग से जुड़े अधिकारियों व कर्मचारियों को सोचना पड़ेगा.
बेहतर उत्पादन लेने से किसान वंचित
गांवों में बिजली नहीं रहने के कारण खेती-किसानी प्रभावित है. ग्रामीण अनुज प्रसाद, संतोष कुमार, प्रकाश यादव, सोनी देवी, गायत्री देवी आदि ने बताया कि खेती में सिंचाई जरूरी है.
समय से बारिश नहीं होने के चलते मोटर पंप के सहारे खेतों में पानी पहुंचाया जाता है़. इससे उत्पादन में भी सहयोग मिलता है़ बिजली नहीं होने से किसान मोटर का उपयोग नहीं कर पाते. इससे समय पर फसल का उत्पादन नहीं हो पाता इससे किसानों को आर्थिक रूप से हानि होती है़ ग्रामीणों ने मांग की है कि ग्रामीणों व देश की बेहतरी के लिए गांवों में बिजली बहाल की जाये़
