नारदीगंज : नारदीगंज थाने में अग्मिशाम सेवा के छोटे वाहन भी नहीं हैं. ऐसे में जिला मुख्यालय या पास का हिसुआ थाना ही सहारा है, लेकिन वहां से वाहन पहुंचते-पहुंचते देर हो जाती है़ तब तक सबकुछ जल कर स्वाहा हो जाता है़ वर्ष 2016 में तकरीबन दो दर्जन से अधिक अगलगी की घटनाएं हुईं हैं.
तरौनी पर के रहनेवाले किसान सुरेंद्र चौहान, श्रीराम कुमार, हंडिया निवासी सुधीर सिंह, अनिल सिंह, गोतरायण निवासी भागवत प्रसाद, मियांबिगहा निवासी भुना सिंह, मुंद्रिका सिंह, सकलदेव सिंह का कहना है कि फायर ब्रिगेड को सूचना देने के बाद भी समय पर गाड़ी नहीं पहुंचती है़ गाड़ी आते-आते सबकुछ स्वाहा हो जाता है़ उसके बाद ऐसा लगता है, मानों जले पर नमक छिड़कने के लिए गाड़ी आयी हो़ हर वर्ष प्रखंड क्षेत्र के गांवों में दर्जनों अगलगी की घटनाएं होती हैं. इसके बाद भी प्रशासन कोई व्यवस्था नहीं करता़ अधिकारियों द्वारा घटनास्थल का निरीक्षण कर खानापूर्ति कर दी जाती है.
लाखों की संपत्ति जलने पर सरकार द्वारा मुआवजा का मरहम लगा दिया जाता है़ पिछले साल कई मवेशी आग से झुलस गये थे. मियां बिगहा गांव के तकरीबन आधा दर्जन किसानों की छह एकड़ में लगी गेंहू की फसल जल कर राख हुई थी. ग्रामीणों का कहना है कि आपसी तालमेल व सहयोग से आग पर काबू पाया गया. जब सब कुछ जल कर राख हो जाता है, तो अग्निशामक दल पहुंचता है़ पीड़ितों का कहना है कि अगर प्रखंड मुख्यालय में अग्निशामक दल की व्यवस्था होती, तो नुकसान से बचा जा सकता था.
