काम के अनुरूप मानदेय नहीं

मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे रसोइये एक हजार मासिक में नहीं होगा गुजारा सुबह नौ से शाम चार बजे तक करना पड़ता है काम हिसुआ : स्कूलों में मध्याह्न् भोजन योजन योजना के तहत खाना बनाने वाले रसोइयों को एक मजदूर के दैनिक मजदूरी से भी कम पैसा मिल रहा है. इससे उनका गुजारा […]

मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे रसोइये

एक हजार मासिक में नहीं होगा गुजारा

सुबह नौ से शाम चार बजे तक करना पड़ता है काम

हिसुआ : स्कूलों में मध्याह्न् भोजन योजन योजना के तहत खाना बनाने वाले रसोइयों को एक मजदूर के दैनिक मजदूरी से भी कम पैसा मिल रहा है. इससे उनका गुजारा नहीं हो पा रहा है.

रसोइयों को इसके अलावा और किसी तरह की आमदनी नहीं है. उनको कोई अन्य काम करने का समय भी नहीं मिल पाता है. सुबह नौ बजे से स्कूल में आ कर भोजन बनाने की तैयारी में जुट जाना पड़ता है. काफी मात्र में भोजन बनाना, बच्चों को परोसना और फिर भोजन बनाने के बरतन को साफ करना, किचन की साफ-सफाई, घटी सामग्री की सूची आदि बनाने में दिन भर का समय कट जाता है़ मुश्किल से चार बजे तक कामों से निवृत्ति मिलती है़ पूर्ण रूप से इसी पर आश्रित रसोइयों के परिवार का भरण-पोषण यहां के प्राप्त मानदेय से नहीं हो पा रहा है. रसोइया लगातार इसकी मांग करने की बात कहते हैं.

मुश्किल से हो रहा पोषण

मेनू के अनुसार हर दिन अलग-अलग काफी मात्र में पोषाहार बनाना पड़ता है. बुनियादी विद्यालय बगोदर के रसोइया अखिलेश्वर, सरोज देवी, अदालत पासवान, मिथिलेश सिंह और मध्य विद्यालय, हिसुआ की रसोइया लीलावती देवी, ताहिरा खातून, मीना देवी, ललिता देवी, सीमा देवी, ललिता देवी ने अपना दुखड़ा सुनाते हुए बड़ी मुश्किल से भरन पोषण होने की बात कहीं. हिसुआ की विधवा सीमा देवी अपने विकलांग बच्ची बबली को साथ लेकर रसोई बनाने आती हैं. उसने बच्ची का परवरिश भी ठीक से नहीं होने की बात कहीं.

लकड़ी पर भोजन बनाने से परेशानी

स्कूलों में गोयठा और लकड़ी पर पोषाहार बनाया जाता है़ इससे रसोइयों की परेशानी और बढ़ी रहती है़ बेहतर ईंधन नहीं रहने से भोजन बनने में देर होती है़ रसोइयो ने बताया कि खाना बनाने के दौरान निकलने वाले धुएं से परेशानी बढ़ती है. बनाने के बड़े बरतनों में कालीख लगती है, जिसे साफ करने में भी रसोइयों को मशक्त करनी पड़ती है. चाह कर भी रसोई का काम कम समय में नहीं निबट पाता है़

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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