वारिसलीगंज : प्राचीन काल से ही अल्पाहार में सत्तू का महत्वपूर्ण स्थान रहा है.यह पोषण के साथ मोटापा और डायबिटीज को नियंत्रण करता है. पिज्जा और बर्गर के इस युग में अल्पाहार के रूप में सत्तू की कल्पना नहीं की जा सकती है, लेकिन गुणवत्तापूर्ण, स्वादिष्ट व स्वास्थ्यवर्धक होने के कारण आज भी सत्तू के चाहनेवालों की संख्या असंख्य है. सत्तू इंडियन फास्ट फूड है, जो तत्काल शक्ति प्रदान करता है़. वैसे लोग जो प्रतिदिन धूप में अत्यधिक थकाने वाला श्रम करते हैं,उनके लिए सत्तू का प्रयोग अति लाभकारी होता है.
सत्तू है क्या
सत्तू एक देशी खाद्य है, जो भूने हुए चने व जौ को पीस कर बनाया जाता है. सत्तू बिहार में काफी लोकप्रिय है.सत्तु का प्रयोग कई तरीके से किया जाता है. इसे पानी में घोल कर, मुट्ठी बना कर इसका सेवन किया जाता है. इसके अलावा पराठा व लिट्टी में भी इसका प्रयोग किया जाता है.
एक संपूर्ण खाद्य
चना व जौ से बना सत्तू पेट के लिए काफी फायदेमंद है. सत्तू के प्रयोग से पेट में एसिड की समस्या दूर होती है. जल्दीबाजी, तनाव व मिर्च मसाले के अत्यधिक सेवन करने से पेपटिक ग्रंथी से गैस्ट्रिक जूस का रिसाव होता है, जो सेहत के लिए हानिकारक है. इस रिसाव को कम करने में सत्तू काफी कारगर है.आधुनिक दिनचर्या में इस बीमारी से 90 फीसदी लोग पीड़ित हैं. सत्तू एक आहार है न कि औषधि. इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है.
