अतिक्रमण व अवैध पार्किंग बढ़ा रही समस्या
नवादा कार्यालय : सुबह के मॉर्निंग वॉक से रात के घर लौटने तक ट्रैफिक की चिल्ल पौं आम आदमी के जीवन का हिस्सा बन चुकी हैं. जिला मुख्यालय के आम व खास लोग रोजमर्रा के इस समस्या से अब ऊबने लगे हैं. आये दिन ट्रैफिक में फंसे लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर देखने को मिलता है. जाम में फंसे लोग अक्सर प्रशासनिक नाकामियों पर गुस्सा निकालते दिखते हैं. इधर, प्रशासन के आला अधिकारी दूसरे विभागों पर दोष मढ़ कर अपनी जिम्मेदारियों से छुटकारा पा लेते हैं. फुटपाथों पर अतिक्रमण करके मनमानी करनेवालों के पीछे राजनीतिक संरक्षण भी आड़े आता है. ऐसे में शहर की नब्ज टटोलती प्रभात खबर की रिपोर्ट..
सीमित संसाधनों में ही सिमटा है जनजीवन पिछले दो दशकों में मुख्यालय की जनसंख्या में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है. शहर का दायरा भी बढ़ा है. इस दौरान कई नये मुहल्ले भी बस गये हैं. लेकिन बढ़ती आबादी की तुलना में मुख्य सड़कों का दायरा सिमटा हुआ है. वर्षों पहले से चली आ रही जीने की शैली भी लोगों के परेशानी का सबब बनी है. मुख्य सड़कों के किनारे अतिक्रमण करके दुकानें, ठेले, खोमचें लगाना, बेतरतीब ढंग से गाड़ियां लगा कर खरीदारी करना, चाट, पकौड़े व गुपचुप खाना जैसे कई आम आदतें हैं, जो जाम लगने का कारण बना है. एक किलोमीटर से भी कम के दायरे में बसा मुख्य बाजार ही जिला के सभी जरूरतों को पूरा करने में जुटा है. ऐसे में शहर की सड़कें जरूरतों के अनुसार सिमटती जा रही है.
यातायात के साधनों की आयी है बाढ़ सिकुड़ती सड़कों पर बाइक, चारपहिया गाड़िया, इ रिक्शा, इंजन ठेलों की बाढ़ आयी हुई है. लोग छोटी जरूरतों के लिए भी गाड़ियों का इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे सुबह के नौ बजते ही सड़कों पर गाड़ियों का हुजूम निकल पड़ता है. ऐसे में हरेक सड़क जाम से कराहने लगती है.
प्रशासनिक विभागों में सामंजस्य की कमी ट्रैफिक, परिवहन विभाग व नगर पर्षद में सामंजस्य के अभाव में आम आदमी मुसीबतें झेलने को मजबूर है. पिछले साल नगर पर्षद ने 10 दिवसीय अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया था. इसके तहत शहर के सभी अवैध अतिक्रमण हटा कर नयी व्यवस्था लागू की गयी थी. लेकिन कुछ ही पखवारों में पुलिस विभाग की अनदेखी में अतिक्रमणकारी फिर से पुरानी जगहों पर काबिज हो गये. कई सड़कों पर बनी वनवे व्यवस्था भी ध्वस्त हो गयी है. विभागों में आपसी सामंजस्य की कमी से समस्या विकराल बनते जा रही है. कुछ सफेदपोश राजनीतिज्ञ की शह से भी अतिक्रमणकारियों का मनोबल भी बढ़ा रहता है.
शहर में अवैध ऑटो स्टैंड व इ-रिक्शा के लिए नहीं है नियम कानून
यात्रियों के लिए कई सालों से कोई नया बस स्टैंड नहीं बना है. शहर से दूर बुधौल में बना बस अड्डा सुरक्षा के लहजे से नकारा साबित हो रहा है. ऐसे में इस बस पड़ाव की गाड़ियां शहर में जहां तहां लगती है. अस्पताल रोड, प्रजातंत्र चौक, गया रोड, प्रसाद बिगहा जैसे जगहों पर सुबह शाम दूसरे राज्यों के लिए बसें खुलती हैं. इनके लिए आज तक एक भी बेहतर बस पड़ाव बनाने में जिला प्रशासन नाकाम साबित हुआ है. शहर के प्रसाद बिगहा, खुरी नदी पुल के दोनों सिरे, गया रोड पर बने ऑटो स्टैंड जाम लगने का मुख्य कारण है. इन सड़कों पर लगे इ रिक्शा व ऑटो खुलेआम ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाते दिखते हैं.
