परिस्थितियों में आया बदलाव पर, सामाजिक सोच में नहीं

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस . आधी आबादी के प्रति नजरिया नवादा कार्यालय : आज आठ मार्च है. पूरी दुनिया में महिला सशक्तीकरण, स्वावलंबन, आत्मनिर्भरता का जश्न मनाया जा रहा है. उल्लास हो भी क्यों नहीं. 21 सदी में महिलाएं शिक्षा, स्वास्थ्य, खेलकूद, न्यायपालिका, प्रशासन, राजनीति, अर्थव्यवस्था जैसे तमाम क्षेत्रों में पुरुषों को कड़ी टक्कर दे रही […]

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस . आधी आबादी के प्रति नजरिया
नवादा कार्यालय : आज आठ मार्च है. पूरी दुनिया में महिला सशक्तीकरण, स्वावलंबन, आत्मनिर्भरता का जश्न मनाया जा रहा है. उल्लास हो भी क्यों नहीं. 21 सदी में महिलाएं शिक्षा, स्वास्थ्य, खेलकूद, न्यायपालिका, प्रशासन, राजनीति, अर्थव्यवस्था जैसे तमाम क्षेत्रों में पुरुषों को कड़ी टक्कर दे रही हैं.
घर परिवार की चहारदीवारी से निकल कर आज महिलाएं हरेक क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधा से कंधा मिला कर चल रही हैं. पुरानी दकियानूसी सोच को छोड़ कर समाज ने महिलाओं को बंदिशों से मुक्त किया. अपने सपने को पूरा करने की आजादी दी. घर परिवार के दायरे से निकल कर हर क्षेत्र में अपनी कामयाबी का झंडा बुलंद किया. लेकिन, जिला में अपनी पंख फैलाती बालिकाओं व महिलाओं की स्थिति कुछ अलग ही बयान करती है. ग्राउंड लेवल पर जानकारी लेने से पता चलता है कि परिस्थितियां तो बदली है, लेकिन उनकी स्थिति व उनके प्रति सोच में अभी भी बदलाव के कम आसार दिखते हैं.
आजादी व आत्मनिर्भरता के नाम पर घरों से निकली महिलाओं के कंधे पर बोझ बढ़ा है. हालांकि, कमोबेश जिले में धर्म, संप्रदाय, जाति, वर्ग के बावजूद बच्चियों की आजादी में बढ़ावा साफ दिखता है. आइये, महिलाओं के प्रति सम्मान, आदर व प्रशंसा के लिए महिला दिवस पर जानते हैं कुछ प्रमुख महिला हस्तियों की बात, उनकी नजर से…

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