तीन साल पहले मिली थी स्वीकृति, नहीं लगा काम

अनदेखी. नूरबिगहा में नहीं खुला नवसृजित प्राथमिक स्कूल ग्रामीण कभी बीआरसी, तो कभी जिले में शिक्षा विभाग के कार्यालय का लगा रहे चक्कर पढ़ाई के लिए नूरबिगहा के बच्चे दो किलोमीटर दूर जाने को विवश नारदीगंज : विद्यालय खोलने में अधिकारी दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं. इससे ग्रामीणों में अधिकारियों के प्रति नाराजगी देखी जा […]

अनदेखी. नूरबिगहा में नहीं खुला नवसृजित प्राथमिक स्कूल

ग्रामीण कभी बीआरसी, तो कभी जिले में शिक्षा विभाग के कार्यालय का लगा रहे चक्कर
पढ़ाई के लिए नूरबिगहा के बच्चे दो किलोमीटर दूर जाने को विवश
नारदीगंज : विद्यालय खोलने में अधिकारी दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं. इससे ग्रामीणों में अधिकारियों के प्रति नाराजगी देखी जा रही है. तीन साल पहले विद्यालय खोलने का प्रस्ताव पारित भी हुआ था. स्थानीय ग्रामीणों के साथ तत्कालीन मुखिया ने शिक्षा विभाग के आलाधिकारियों को ध्यान दिलाया था.
शिक्षा विभाग के तत्कालीन प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने भी विद्यालय की स्वीकृति प्रदान करते हुए अंचल कार्यालय को भूमि उपलब्ध कराने के लिए पत्र भी भेजा था. इसके लिए भूमि भी उपलब्ध करा दी गयी, लेकिन फिलहाल स्थिति ढाक के तीन पात बनी हुई है. संचिका कार्यालय की फाइलों में शोभा की वस्तु बनी हुई है. ग्रामीण कभी बीआरसी तो कभी जिले में स्थिति शिक्षा विभाग के कार्यालय का चक्कर लगा कर परेशान हो रहे हैं. यह स्थिति तीन वर्षों से हो रही है.
ग्रामीण स्थिति जानने के लिए कार्यालय पहुंचते हैं तो कोई भी अधिकारी माकूल जवाब नहीं दे पाते हैं. यह स्थिति नारदीगंज प्रखंड की इचुआकरणा पंचायत के नूरबिगहा गांव की है. यह गांव अतिपिछड़ा, पिछड़ी व महादलित बाहुल्य गांव है. इस गांव में कोई भी विद्यालय नहीं है. इससे गांव के बच्चे शिक्षा से दूर हो रहे हैं. शिक्षा के अधिकार अधिनियम की बात बेमानी साबित हो रही है. इस गांव से तकरीबन दो किलोमीटर की दूरी पर विद्यालय है. ग्रामीणों का कहना
है कि विद्यालय की स्थापना के लिए पंचायत समिति में पिछले तीन साल पहले प्रस्ताव पारित हुआ था. इसके आलोक में उक्त गांव में नवसृजित प्राथमिक विद्यालय खोलने के लिए शिक्षा विभाग के माध्यम से मंजूरी भी मिली थी. तब ग्रामीणों के साथ तत्कालीन स्थानीय मुखिया मीना देवी, पूर्व वार्ड सदस्य मोती मोची ने तत्कालीन बीइओ अवध कुमार तिवारी को आवेदन देकर विद्यालय निर्माण की मांग की थी. आवेदन के आलोक में तत्कालीन बीइओ ने अपने पत्रांक 58/14, सात फरवरी 2014 को अंचल कार्यालय नारदीगंज को भूमि उपलब्ध कराने के लिए पत्र लिखा. इसमें उन्होंने दर्शाया था कि इचुआकरणा पंचायत के नूर बिगहा गांव में विभाग द्वारा नये प्राथमिक विद्यालय खोलने का प्रस्ताव प्राप्त है. इसके लिए स्थानीय मुखिया के साथ ग्रामीणों ने आवेदन देकर अनुरोध किया है. अतएव विद्यालय निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध करायी जाये. अंचल कार्यालय द्वारा खाता 245, खेसरा संख्या 3024, रकबा 0.15 डिसमिल जमीन उपलब्ध करायी गयी. बावजूद विद्यालय बनना दूर की बात है, कोई शिक्षक की भी पदस्थापना नहीं हो पायी. इससे बच्चे शिक्षा के लिए मुहताज बने हुए हैं.
क्या कहते हैं ग्रामीण
यह गांव अतिपिछडा गांव है. गांव में विद्यालय नहीं रहने से बच्चे शिक्षा के लिए भटक रहे हैं. सरकार शिक्षा को बढ़ावा देन के लिए दो किलोमीटर की दूरी पर विद्यालय का निर्माण करा रही है. इस गांव में तीन साल पहले विद्यालय की स्वीकृति भी मिली,इसके लिए भूमि का भी अधिग्रहण किया गया. लेकिन विद्यालय भवन नहीं बना. यह सब अधिकारियों की उदासीनता के कारण हो रहा है.
योगेंद्र चौहान, नूरबिगहा
अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के कारण इस गांव में विद्यालय का निर्माण व शिक्षक की पदस्थापना नहीं हो पायी है. इससे गांव के बच्चे शिक्षा से वंचित हो रहे हैं.
रामसेवक चौहान, नूरबिगहा
इस गांव में विद्यालय नहीं रहने से गांव के बच्चे शिक्षा से दूर होते जा रहे हैं. गांव से दो किलोमीटर की दूरी पर पढ़ने के लिए जाने में बच्चे को परेशानी हो रही है. विद्यालय की स्वीकृति होने के बाद भी विद्यालय भवन का निर्माण शिक्षक की पदस्थापना नहीं होना काफी दुख की बात है.
तेतबा देवी, पंच, नूरबिगहा
हम सब ग्रामीण तीन साल से टकटकी लगाये हुए हैं. इसके लिए कभी बीआरसी तो कभी जिले में स्थित कार्यालय का चक्कर लगा कर परेशान हो रहे हैं. कोई भी अधिकारी माकूल जबाब नहीं दे रहे हैं. विद्यालय बनाने की स्वीकृति शिक्षा विभाग द्वारा तथा पंचायत समिति में भी प्रस्ताव पारित हुआ था. सभी संचिका पदाधिकारियों के कार्यालय में शोभा की वस्तु बन कर रह गयी है.
बैधनाथ चौहान, नूरबिगहा

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