पुरातात्विक अवशेष मिलने की संभावना

पहल. कौआकोला के देवनगढ़ में खुदाई शुरू नवादा/ कौआकोल : सरकार के पुरातात्विक विभाग ने जिले के कौआकोल के देवनगढ़ गांव में खुदाई शुरू करवाया है. विभाग को यहां अति प्राचीन अवशेष होने के आसार हैं. शनिवार को विभाग के सचिव चैतन्य प्रसाद व जिलाधिकारी मनोज कुमार धार्मिक अनुष्ठान कर खुदाई के लिए पहला फाबड़ा […]

पहल. कौआकोला के देवनगढ़ में खुदाई शुरू

नवादा/ कौआकोल : सरकार के पुरातात्विक विभाग ने जिले के कौआकोल के देवनगढ़ गांव में खुदाई शुरू करवाया है. विभाग को यहां अति प्राचीन अवशेष होने के आसार हैं. शनिवार को विभाग के सचिव चैतन्य प्रसाद व जिलाधिकारी मनोज कुमार धार्मिक अनुष्ठान कर खुदाई के लिए पहला फाबड़ा चलाया. पता चला हे इस इलाके में देवनगढ़ को लंबे समय से पुरातात्विक गांव के रूप में पहचान मिली हुई है. यहां प्राचीन अवशेषों के छुपे होने की संभावना जतायी जाती है. इसे लेकर विभाग ने खुदाई शुरू किया है.
क्या है देवनगढ़ में कालांतर में इस गांव को दीवान गढ़ के नाम से जाना जाता था. बाद में यह अपभ्रंश होकर देवनगढ़ कहलाने लगा. यह गांव कौआकोल-पकरीबरावां सड़क के पास बघेल नदी के किनारे बसा है. यहां का गढ़ लगभग 85 एकड़ भू-भाग पर फैला है. ईसा पूर्व यह गांव प्रसिद्ध सांस्कृतिक व पुरातात्विक केंद्र के रूप में जाना जाता था.
लगभग छठी शताब्दी में देवनगढ़ मानव सभ्यता का प्रमुख केंद्र था. यहां की भूमि के निचली सतह से कृष्ण लोहित मृद भांड के मिलने की संभावना बनी है. इसके पहले यहां से कृष्ण मार्जित मृद भांड के अवशेष मिले हैं. यह जिले के प्रसिद्ध नारद संग्रहालय में संरक्षित है. यहां से मिली मूर्ति व शिलाचित्र कौआकोल के कोल्हुआर गांव के देवी मंदिर परिसर में सुरक्षित रखा हुआ है. गांव के लोग इसकी पूजा करते हैं. देवनगढ़ गांव से जुड़ी कथा का संबंध जिले के वारिसलीगंज स्थित पार्वती पहाड़ी से लेकर रोहतास जिले के बुधुवन तक है.

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