बायोगैस से आर्थिक बचत

जागरूकता कार्यक्रम व प्रचार पर देना होगा जोर नवादा : महंगी होती बिजली और रासायनिक रसोई गैस से बचने व आर्थिक बचत को लेकर बायो गैस काफी कारगर हो सकता है. ग्रामीण क्षेत्रों में जलावन के रूप में गोबर का पपला या गोइठा का इस्तेमाल होता है. यह ऊर्जा के लिए कारगर है. इसका सबसे […]

जागरूकता कार्यक्रम व प्रचार पर देना होगा जोर

नवादा : महंगी होती बिजली और रासायनिक रसोई गैस से बचने व आर्थिक बचत को लेकर बायो गैस काफी कारगर हो सकता है. ग्रामीण क्षेत्रों में जलावन के रूप में गोबर का पपला या गोइठा का इस्तेमाल होता है. यह ऊर्जा के लिए कारगर है. इसका सबसे पहले बायो गैस के रूप में व इससे प्राप्त स्लरी का इस्तेमाल वर्मी कंपोस्ट में उर्वरक प्राप्त करने के लिए किया जाये, तो निश्चित रूप से ऊर्जा के साथ-साथ उर्वरक प्राप्त करने में सामंजस्य स्थापित हो सकता है.

गैर परंपरागत ऊर्जा के स्नेत में बायो गैस अपना महत्वपूर्ण स्थान रखता है. इसके उत्पादन में घरेलू व खेती के अवशिष्ट पदार्थो का इस्तेमाल होता है. इन अवशिष्ट पदार्थो को एक विशिष्ट संयंत्र में डाल कर प्राकृतिक प्रक्रिया द्वारा बायो गैस उत्पादित किया जाता है. इस विधि से उत्पादित गैस में मूलत: मिथेन जो एक ज्वलनशील गैस है, वह प्राप्त होती है. इसका इस्तेमाल भोजन बनाने, लाइट जलाने व कृषि उपयोगी संयंत्रों के संचालन में किया जाता है. कुल मिला कर कहा जाये, तो बायो गैस एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से हम ऊर्जा संयंत्र करने में किसी पर निर्भर नहीं होते हैं और कम खर्च या फिर न के बराबर खर्च पर हम ऊर्जा प्राप्त कर कई कार्यो का लाभ आसानी से ले सकते हैं. इसके विस्तार को लेकर प्रदेश सरकार योजनाएं भी चला रखी है. इसमें 90 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है.

हालांकि, प्रदेश के कई जिलों में गोबर आधारित बायो गैस से फायदा लिया जा रहा है. परंतु, इस जिले में इसके लिए किसी प्रकार का कोई प्रोत्साहन कार्यक्रम नहीं चलाये जोन से इस परंपरागत ऊर्जा स्नेत से वंचित होते जा रहे हैं. नयी पीढ़ियों के लोगों को इसके लिए जागरूक करने की सख्त जरूरत है.

क्या है उत्पादन प्रक्रिया

बायो गैस उत्पादन की प्रक्रिया एक आवासीय प्रक्रिया है, जो कि एक डाइजेस्टर में पूरा होता है. यह डाइजेस्टर एक बेलनाकार टैंक होता है. इस बेलनाकार टैंक का निर्माण ईंट व सीमेंट या इस्पात का बना होता है. इसके बगल से एक छिद्र होता है, जिसे अंतरमुखी द्वार कहा जाता है. इस द्वार से कच्चे पदार्थ गोबर को डाला जाता है. यह संग्राहक इस्पात या अन्य धातुओं का बना होता है. लगभग 50 दिन बाद अपेक्षित मात्र में गैस का निर्माण हो जाता है. इसका उपयोग घरेलू कार्यो में किया जाता है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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