– विपिन कुमार –
वारिसलीगंज : प्रखंड मुख्यालय से करीब पांच किलोमीटर पूरब ठेरा गांव में स्थित शिवलिंग दिन में तीन बार रंग बदलता है. यह कोई किवदंती नहीं बल्कि, आंखों से देखा जा सकता है. सुबह में सफेद, दोपहर में नीला व दिन ढलते ही शिवलिंग का रंग लाल हो जाता है. बाबा तटेश्वर नाथ के नाम से मशहूर इस लिंग की स्थापना को लेकर कई प्रकार की भ्रांतियां भी है.
लोगों का कहना है कि सैकड़ों वर्ष पहले गांव के दक्षिण छोर पर स्थित श्मशान के किनारे बहती नदी के ऊपर शिवलिंग को देखा गया था. वहीं, कुछ का कहना है कि कालांतर में भटके हुए एक संन्यासी ने लिंग की खोज की थी. भ्रांतियां चाहे जो भी हो, लेकिन यह सत्य है कि वर्षो से क्षेत्रीय लोगों की हर मनोकामना की सिद्धि इस मंदिर से होती रही है.
शिव पुराण में है जिक्र
शिव पुराण में भारत वर्ष के पांच कामना शिव लिंगों की चर्चा है. इसमें ठेरा गांव का बाबा तटेश्वर नाथ कामना लिंग का जिक्र है. लोगों का कहना है की देवघर स्थित शिवलिंग का रंग व आकार ठेरा स्थित मंदिर के शिवलिंग से काफी मिलता जुलता है. महज लिंग के स्पर्श से असाध्य रोग का निवारण होते देखा गया है.
मंदिर भूमि का अतिक्रमण
ठेरा गांव पर बाबा तटेश्वर नाथ की कृपा दृष्टि चाहे जितना भी हो, लेकिन ग्रामीण भक्ति, यश व कृपा को ताक पर रख कर मंदिर की भूमि को अतिक्रमण करने से नहीं चुकते. बाबा तटेश्वर नाथ के नाम से कुल सात एकड़ 65 डिसमिल भूमि अंचल के दस्तावेजों में दर्ज है, लेकिन फिलहाल देखने में यह भूमि लगभग दो एकड़ ही दिखायी पड़ती है.
शिवरात्रि पर उमड़ती है भीड़
महाशिवरात्रि के मौके पर बाबा तटेश्वर नाथ मंदिर के प्रांगण में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ता है. प्रशासन की देख रेख में इस अवसर पर दंगल प्रतियोगिता का आयोजन कर पहलवानों को पुरस्कृत किया जाता है. इसमें कई जिलों के पहलवान शिरकत करते हैं.
