बढ़ रहा उत्पादन व आय भी

पर्यावरण व सेहत के लिए है वरदान नवादा : भारत कृषि प्रधान देश के रूप में जाना जाता है. यहां खेती को बढ़ावा देने के लिए नित नये-नये प्रयोग होते रहे हैं. परंतु, भाग-दौड़ के परिवेश सब कुछ जल्दी-जल्दी पाने की ललक ने प्रकृति को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया. इतना ही नहीं मनुष्य के […]

पर्यावरण व सेहत के लिए है वरदान

नवादा : भारत कृषि प्रधान देश के रूप में जाना जाता है. यहां खेती को बढ़ावा देने के लिए नित नये-नये प्रयोग होते रहे हैं. परंतु, भाग-दौड़ के परिवेश सब कुछ जल्दी-जल्दी पाने की ललक ने प्रकृति को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया. इतना ही नहीं मनुष्य के जीवन में भी जहर घुलने लगा है और इन्सान कमजोर होता चला जा रहा है. बीमारियों से जूझने की क्षमता भी घटने लगी है. इन सब का बड़ा कारण है रासायनिक खाद का इस्तेमाल करना.

इन सभी कुप्रभावों से बचने के लिए और पर्यावरण को संरक्षित करने के उद्देश्य से जैविक खाद को बढ़ावा दिया जा रहा है. कालांतर में हमारे पूर्वज जैविक खाद का ही इस्तेमाल करते थे. इससे उन दिनों इन्सान व पर्यावरण दोनों ही सुरक्षित रहता था. आज खेती के लिए आवश्यक खाद व कीटनाशक रसायनों की बढ़ती खपत ने कई जटिल समस्याओं को जन्म दे दिया है. विभिन्न प्रकार के प्रदूषण का फैलना, जल की कमी, कूड़ा-करकट व कचरे कि मात्र में हो रही वृद्धि जैसी समस्याओं ने मनुष्य और पर्यावरण के समक्ष भयंकर समस्या उत्पन्न कर दिया है. ऐसी स्थिति से निबटने के लिए जरूरी हो गया है कि हम वैकल्पिक संसाधनों का इस्तेमाल पूर्वजों की तरह ही करना शुरू कर दें. जैविक खाद का उपयोग हमारे समक्ष एक ऐसा ही वैकल्पिक उपाय है, जिसके द्वारा हम टिकाऊ खेती कर कृषि व पर्यावरण दोनों के साथ साथ हम स्वयं को भी खुशहाल बना सकते हैं. वर्मी कंपोस्ट में जैविक खाद का उत्पादन काफी सरल और आसान है.

सरल शब्दों में कहा जाये, तो कृत्रिम विधि द्वारा केंचुआ पालने को वर्मी कल्चर और इन्हीं केंचुआ द्वारा बेकार कार्बनिक पदार्थो से खाद मिलने की प्रक्रिया को वर्मी कंपोस्टिंग कहते हैं. कृत्रिम विधि से केंचुआ पालना (वर्मी कल्चर) और केंचुआ की मदद से जैविक खाद बनाना दो अलग-अलग परंतु मिली-जुली प्रक्रियाएं हैं, जिसे हम वर्मी टेक्नोलॉजी कहते हैं.

वर्मी कंपोस्ट में पोषक तत्वों की मात्र

वर्मी में रसायनिक खादों की तुलना में नाइट्रोजन पांच गुणा, फॉस्फेट 1.5 गुणा, पोटाश दो गुणा व जिंक 2.5 गुणा से तीन गुणा अधिक पाया जाता है. साथ ही कैल्सियम भी प्रचुर मात्र में उपलब्ध है. वर्मी कंपोस्ट में पाये जाने वाले पोषक तत्व इस प्रकार है-जैविक कार्बन 9.15 से 17.98 प्रतिशत, कुल नेत्रजन दो से तीन प्रतिशत फॉस्फोरस 1.55 से 2.25 प्रतिशत, पोटाश 1.85 से 2.5 प्रतिशत कैल्शियम 1.00 से 1.2 प्रतिशत, मैग्नेशियम 0.3 से 0.5 प्रतिशत तांबा 120 से 3600 पीपीएम, सल्फर 0.8 से 1.5 प्रतिशत जस्ता 120 से 3600 पीपीएम लोहा 0.8 से 1.5 प्रतिशत पाया जाता है.

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