लापरवाही. मई में हजारों रसोई गैस उपभोक्ता सब्सिडी के रुपये से हो जायेंगे वंचित
रसोई गैस में सब्सिडी पाने के लिए उपभोक्ताओं को आधार नंबर अपने-अपने गैस एजेंसियों में लिंकअप कराना जरूरी है. पिछले छह माह से इसके लिए गैस एजेंसियों के प्रचार-प्रसार के बाद भी अब तक मात्र 50 प्रतिशत उपभोक्ता ही आधार नंबर लिंकअप करा सके हैं. आधार नंबर लिंकअप कराने की आखिरी तिथि 30 अप्रैल है. मई से आधार नंबर लिंकअप नहीं करनेवाले उपभोक्ताओं की गैस सब्सिडी रोक दी जायेगी.
नवादा (सदर) : अप्रैल के बाद जिले के हजारों रसोई गैस उपभोक्ता सब्सिडी राशि प्राप्त करने से वंचित हो जायेंगे. विभिन्न तेल व गैस एजेंसियों द्वारा सभी उपभोक्ताओं को अपने आधार नंबर का लिंकअप कराने की आखिरी तिथि 30 अप्रैल निर्धारित की है. 30 अप्रैल तक आधार कार्ड जमा नहीं करनेवाले उपभोक्ताओं की सब्सिडी राशि रोक दी जायेगी. ऐसे हालत में उपभोक्ता को बगैर सब्सिडी का रसोई गैस लेना पड़ेगा. विगत छह माह से जिले भर के सभी गैस एजेंसियों द्वारा व्यापक प्रचार-प्रसार कर उपभोक्ताओं को अपने आधार का लिंकअप कराने के लिए जोर दिया गया.
परंतु हालात यह है कि छह महीने बाद भी 40 से 50 प्रतिशत उपभोक्ता ही अपने आधार नंबर को गैस उपभोक्ता संख्या से लिंकअप कराये हैं. गैस एजेंसी संचालकों का मानना है कि आधे से अधिक उपभोक्ता अभी भी आधार कार्ड नहीं जमा कर पाये है.
इसके पीछे सबसे बड़ा कारण माना जाता है कि जिले के 52 प्रतिशत से अधिक लोगों का आधार कार्ड बना ही नहीं है. कई ऐसे उपभोक्ता भी हैं जिनका आधार कार्ड बना तो था, परंतु डाक विभाग की लापरवाही से उनके दिये गये पते पर नहीं पहुंच पाया.
केंद्रीय सरकार द्वारा सब्सिडी राशि प्राप्त करने के लिए आधार कार्ड को मूल आधार बनाये जाने के बाद विभिन्न तेल गैस एजेंसियों में अपने-अपने गैस एजेंसियों से उपभोक्ताओं का आधार नंबर प्राप्त करने का निर्देश दिया था. तेल गैस कंपनियों के निर्देश के बाद सभी गैस एजेंसियों ने अपने उपभोक्ताओं से आधार कार्ड जमा कराने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार किया था.
इसी के परिणाम स्वरूप 40 से 50 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने अपना आधार नंबर एजेंसियों में जमा करा रखा है. जबकि प्रेसर के बाद भी शेष उपभोक्ता आधार नंबर उपलब्ध नहीं करा पा रहे है. ऐसे उपभोक्ताओं की शिकायत है कि मेरा आधार कार्ड बना ही नहीं है, तो जमा कहां से करूं. हालात यह है कि आधार कार्ड बनाने के लिए ऐसे लोग जगह-जगह खाक छानते रहे, परंतु उनका आधार कार्ड नहीं मिला.
इसके पीछे लोगों की शिकायत है कि आधार कार्ड बनाने वाली एजेंसियों ने सारे लोगों का आधार कार्ड बनाने के बजाय अपना काम ही समाप्त कर दिया है. जबकि कई स्थानों पर दुकान खोलकर बैठे ऐसे आधार कार्ड बनाने वाले लोगों के आने का इंतजार करते हैं.
ग्रामीण इलाकों की हालात यह है कि इन क्षेत्रों में आधार कार्ड बनाने वाली एजेंसियां नियमित रूप से कार्ड बनाकर उपभोक्ताओं का उपलब्ध नहीं करा पायी. इससे आधार कार्ड के लिए सब कुछ करने के बाद भी उनका आधार कार्ड नहीं मिल पाया है.
डाकघर भी कम जिम्मेवार नहीं
लोगों का बन रहे आधार कार्ड उनके बताये पते पर नहीं पहुंच पाने के लिए डाकघर भी कम जिम्मेवार नहीं है. विभिन्न आधार केंद्रों पर आधार कार्ड के लिए पंजीयन करानेवाले लोगों का आधार कार्ड नहीं मिल पाया है.
तीन महीने पूर्व प्रधान डाकघर में काफी संख्या में आधार कार्ड आने के बाद भी उसका नियमित रूप से वितरण नहीं किया गया. हालात यह है कि ऐसे आधार कार्डों को बोरे में भर कर विभाग द्वारा कचरे खाने में फेंक दिया गया है. दूसरी विकल्प से भी लोगों का आधार कार्ड नहीं निकल पा रहा है. केंद्र सरकार की इस योजना में लोगों को आधार कार्ड बनाने के लिए कोई भी शुल्क अदा नहीं करना था. पंजीयन कराने के बाद साइबर कैफे आधार कार्ड निकलवाने के लिए उपभोक्ताओं को 50 से 100 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं.
