सकरी नदी के पूरब बसे दर्जनों गांवों के लोग 2002 से ही आने-जाने में हो रही परेशानी के मद्देनजर संघर्ष कर रहे हैं, महज एक पुल के लिए. लेकिन अब तक सकरी नदी पर पुल नहीं बन सका है. अब लोग हाइकोर्ट जाने की तैयारी में हैं.
नवादा कार्यालय : कभी हनुमान चालीसा पढ़ कर लोग सफर तय करते थे. चेचरी से बने नाव का लेते थे सहारा. पानी कम होने का कई-कई दिनों तक इंतजार होता था. फिर कयास लगा सकते हैं कि सकरी की तेज धाराओं से लड़ कर लोग कैसे जीवन जीने की जद्दोजहद करते होंगे. यह कोई कल्पना नहीं.
हकीकत है, उन गांवों की जो सकरी नदी के पूरब बसे हैं. ये लोग लंबे समय से गोसांई बिगहा के पास सकरी नदी पर एक पुल बनाने की लड़ाई लड़ रहे हैं. ताकि इनका जीवन थोड़ा सहज और सुगम हो सके. पर, अबतक ऐसा हो नहीं सका है. लिहाजा अब यहां के लोगों ने हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाना उचित समझा है. एक अवमानना वाद लाने की तैयारी चल रही है.
क्या है पूरा मामला : नवादा जिला मुख्यालय के मिरजापुर से होते हुए गोसांई बिगहा के नजदीक सकरी नदी पर एक पुल की जरूरत वर्षों से महसूस की जा रही है. इसके लिए नदी पार के लोगों ने वर्ष 2002 में एक संघर्ष समिति का गठन कर रखा है. समिति ने जनहित का हवाला देते हुये सीडब्ल्यूजेसी-9328/13 के तहत पटना हाइकोर्ट में एक वाद दायर किया.
कोर्ट ने इस मामले में तीन माह के अंदर पुल निर्माण कर संसूचित करने का आदेश दिया, पर ऐसा नहीं हो सका. फिर संघर्ष समिति ने एमजेसी-6089 के तहत अवमानना का वाद दायर किया. सरकार अपनी गर्दन बचाने के लिए विभागीय अभियंता से एक फर्जी प्रतिवेदन कोर्ट को सैंप कर सो गयी. संघर्ष समिति ने सीडब्ल्यूजेसी-15355/14 के तहत एक दूसरा जनहित याचिका दायर कर दिया. इस मामले में भी पुल निर्माण का आदेश कोर्ट ने दिया. फिर भी सरकार व विभाग नहीं जाग सकी. अब सवाल यह है कि न्याय के साथ विकास व सबको न्याय का वाद कर चुकी सरकार का यह कौन सा चेहरा है,जिसका दंश सकरी पार के लोगों को झेलना पड़ रहा है.
कितनी आयेगी लागत : 13 जून 2010 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नवादा में अपनी विश्वास यात्रा के दौरान पहुंचे थे. यह मामला इसके पहले से आंदोलन का रूप ले चुका था. लिहाजा आमजनों की दुखती रग पर मुख्यमंत्री ने हाथ रख दिया. सहलाया और कहा 31 करोड़ 81 लाख रुपये की लागत से गोसांई बिगहा केपास सकरी नदी पर पुल का निर्माण कराया जायेगा. तकनीकी जानकारी के अनुसार, यहां पर नदीं की दौड़ाई लगभग 16 सौ फुट है.
इसके प्राकल्लन का आदेश जारी हुआ, पर सब घोषणा की तरह हवा-हवाई हो गयी. अनुमान लगाया जा रहा है कि अब इसके निर्माण पर लगभग 50 करोड़ रुपये खर्च होंगे. सबसे पहले आठ जुलाई 2005 को जिला प्रशासन ने इसके लिए प्राकल्लन तैयार करवाया. तब लागत सिर्फ 16 करोड़ 10 लाख 64 हजार रुपये आ रहे थे.
