संकट. ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति को लेकर प्रशासन के सारे दावे फेल
जलस्तर में गिरावट का असर सभी ओर देखने को मिल रहा है. शहरी क्षेत्रों में संपन्न लोग तो किसी प्रकार पानी की उपलब्धता कर पा रहे हैं. लेकिन गांवों में खास कर पिछड़ी व महादलित बस्तियों में पेयजल के लिए हाहाकार मचा हुआ है. जिला मुख्यालय से महज छह किलोमीटर की दूरी पर बसे दूधैली गांव में चापाकल खराब होने व महीनों से बिजली नहीं रहने के कारण गांववालों के सामने पानी के लिए समस्या उत्पन्न हो गयी है.
नवादा (नगर) : शासन द्वारा शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति को लेकर बड़े-बड़े दावे किये जा रहे है. लेकिन धरातल पर स्थिति काफी भयावह दिख रही है. गांव के सैकड़ों लोगों को एक ही चापाकल से पानी भरकर काम चलाने के लिए विवश होना पड़ रहा है. विभाग का दावा है कि खराब चापाकलों को ठीक करने के लिए मैकेनिक का दल गांव-गांव जाकर मरम्मत का काम कर रहा है. लेकिन सदर प्रखंड की बरेव पंचायत के दुधैली गांव व दुधैली गांव के महादलित बस्ती आजाद नगर में पानी के लिए हाहाकार मचा है. गांव में केवल एक चापाकल कार्यरत है.
जबकि गांव में लगे कई चापाकल का वाटर लेयर फेल हो चुका है. अथवा मरम्मत के अभाव में खराब पड़ा है. दुधैली गांव में पेयजल आपूर्ति के जो भी साधन है, वे बेकार साबित हो रहे हैं. गांववालों के लिए खेती व जानवरों को पानी उपलब्ध कराने की बात तो दूर खुद के लिए भी पानी जुटा पाना मुश्किल भरा काम है. ग्रामीणों के बीच अक्सर पानी भरने को लेकर तू-तू, मैं-मैं की घटना होते रहती है.
कई चापाकल हैं बेकार : ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति के लिए चापाकल सबसे अच्छा माध्यम है. लेकिन चापाकल खराब रहने के कारण गांववालों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है. बरेव पंचायत के दुधैली गांव में चापाकल के साथ ही बरेव में बने पानी टंकी द्वारा पाइप के माध्यम से पेयजल पहुंचाने की व्यवस्था है. लेकिन यह व्यवस्था अधिकारियों की मनमानी की भेंट चढ़ गया है. गांव में लगभग एक दर्जन से अधिक चापाकल बेकार पड़े हैं. जबकि महीनों पहले सड़क निर्माण के नाम पर की गयी खुदाई में वाटर सप्लाइ का पाइप कई जगह टूट गये हैं. इधर, गांव में लगे दोनों ट्रांसफॉर्मर खराब हो जाने से पिछले एक महीने से बिजली भी नहीं मिल रही है.
आजादनगर में हालात बेहद खराब : दुधैली गांव के महादलित बस्ती आजाद नगर में हालात बेहद खराब है. गांव में लगभग एक सौ घरों में पांच सौ की आबादी रहती है. गांव के सभी चापाकल या तो वाटर लेवल की कमी के कारण फेल हो चुके हैं. या खराबी के कारण बेकार पड़े हैं. बरेव पानी टंकी से इस क्षेत्र में पाइप लाइन द्वारा सप्लाइ भी नहीं की गयी है. फिलहाल आंगनबाड़ी के पास एक मात्र चापाकल ही पूरे गांव के लिए पानी का एक मात्र साधन बना हुआ है. सुबह से ही घर की महिलाएं, बच्चे व बड़े बरतन लेकर चापाकल की ओर भागते दिखते हैं. क्योंकि पानी की जरूरत की सभी काम इसी चापाकल से हो रहा है.
पानी की कमी से आग नहीं बुझा सके
गांव के अकलु मांझी के घर के आगे रखे गेहूं के 50 से 60 बोझे बुधवार की रात जलकर राख हो गया. गांव के लोग आग बुझाने के लिए पानी के लिए भटकते रहे. काफी दूर से बाल्टी भर पानी ला-ला कर आग को बुझाने की नाकाम कोशिश करते रहे. लेकिन, गेहूं के अनाज को नहीं बचाया जा सके.
इसके एक दिन पहले दुधैली मधुवन टोला में भी विधवा फुल कुमारी देवी के घर में आग लग गयी थी, जिसमें पूरा घर जल कर राख में बदल गया. पानी की कमी के कारण यहां भी आग नहीं बुझाया जा सका. गांव के भगत मांझी, छोटू मांझी, बैगन मांझी, सिद्धेश्वर मांझी, अकलु मांझी आदि ने कहा कि पीने के लिए पानी नसीब नहीं हो रहा है, तो आग बुझाने के लिए पानी कहां से लाते.
दोनों ट्रांसफॉर्मर खराब, अधिकारी मौन
दुधैली के ग्रामीण खराब पड़े ट्रांसफॉर्मर को ठीक करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं. लेकिन विभागीय अधिकारी द्वारा कोई पहल नहीं की जा रही. संजय कुमार, सुजीत कुमार, मुकेश कुमार, बबलू सिंह, रामाश्रय प्रसाद, इंद्रभूषण प्रसाद, हरिहर सिंह आदि ने कहा कि गांव में राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के तहत 16-16 केवीए का दो ट्रांसफॉर्मर है. एक तीन महीना पहले खराब है.
जबकि दूसरा ट्रांसफॉर्मर लगभग एक माह पहले खराब हो गया है. इससे पूरे गांव में बिजली ठप है. बिजली व पानी की उपलब्धता को लेकर विद्युत विभाग व पीएचइडी विभाग को कई बार लिखित व मौखिक रूप में शिकायत की गयी है, लेकिन कोई सुननेवाला नहीं है.
