नवादा (सदर) : प्रदेश में शराब पर लगे प्रतिबंध का 10 दिन बाद ही असर दिखने लगा है. शराब के शौकीन शराब की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं, वहीं उनकी पत्नियों में उत्साह दिख रहा है. 10 दिनों में कई घरों का माहौल ही बदल गया है. रोज-रोज की खीच-खीच व गाली-गलौज से मिली मुक्ति पर महिलाएं काफी खुश नजर आ रही है.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस ऐतिहासिक कदम की सराहना करते हुए महिलाओं के जुबान से बरबस ही यह शब्द निकल जा रही है कि यह प्रतिबंध काफी पहले लग जाना चाहिए था.
शराब पर लगे प्रतिबंध के बाद पीनेवालों के घरों में आर्थिक बचत के साथ-साथ माहौल भी खुशनुमा हो गया है. ऐसे लोग अब अपनी पत्नी व बच्चों के साथ ज्यादा समय देने लगे हैं. महिलाओं का मानना है कि एक अप्रैल से पहले किसी न किसी बहाने से पति शराब का सेवन कर प्रतिदिन आया करते थे. शराब के नशे में धूत होकर गंदी-गंदी गालियां देते थे. इसका असर बच्चों पर भी पड़ता था. बच्चे भी अपने पिता के पास ऐसी हालत में जाने से सहमते थे. कभी-कभी तो नशे में चूर ऐसे लोग अपनी पत्नी व बच्चे को अकारण पीट दिया करते थे. महिलाओं ने शराब बंदी के बाद घर में आर्थिक बचत के साथ-साथ बदले माहौल को काफी सार्थक मानती है.
बदल गये शराब बेचनेवालों के कारोबार
शराब पर लगे प्रतिबंध के पूर्व ही शराब के धंधे से जुड़े लोगों ने अपने-अपने कारोबार बदलने का मन बना लिया था. प्रतिबंध लगने के साथ ही शराब बेचनेवाले लोगों का कारोबार भी बदल गया है. कोई फल की दुकान खोल रखे हैं तो कोई ठंडा की दुकान चला रहे हैं.
कुछ ने तो बीड़ी व सिगरेट की दुकान खोल रखी है. कुछ लोग दवा की दुकान खोलने के प्रयास में लग गये हैं. शराब दुकानों में काम करनेवाले कर्मचारी दूसरे किसी अन्य धंधा में जुट गये हैं. कोई अपना बिजनेस चलाने की तैयारी में है, तो कुछ लोग बिहार से पलायन भी करने का मूड बना रखे हैं. शराब के धंधे से जुड़े एक व्यक्ति ने पुरानी दुकान को बंद कर फैमिली रेस्टूरेंट खोल दिया है.
