रामगढ़ : सोमवार की अहले सुबह चार बजे से हुई शानदार बरसात ने प्रखंड क्षेत्र के किसानों के होठों की खोयी हुई मुस्कान वापस ला दी है. सोमवार की सुबह हो रही तेज बरसात से चारों तरफ खेतों में पानी ही पानी दिख रहा है. धरती के अन्नदाता कहे जाने वाले किसानों के खेतों की प्यास जो पिछले कई माह से प्रखंड क्षेत्र की दो नहरे गारा चौबे व करगहर नहर नहीं बुझा पायी.
मूसलधार बारिश के बाद खेतों में दिखे िकसान, धान की रोपनी शुरू
रामगढ़ : सोमवार की अहले सुबह चार बजे से हुई शानदार बरसात ने प्रखंड क्षेत्र के किसानों के होठों की खोयी हुई मुस्कान वापस ला दी है. सोमवार की सुबह हो रही तेज बरसात से चारों तरफ खेतों में पानी ही पानी दिख रहा है. धरती के अन्नदाता कहे जाने वाले किसानों के खेतों की […]

नहरों में पानी आने को लेकर किसान जनप्रतिनिधि से लेकर प्रशासनिक पदाधिकारी तक गुहार लगा चुके थे. ऐसे में सोमवार को हुई बरसात ने किसानों को संजीवनी सा काम की है. सोमवार की हुई इस बरसात से किसान पहले से डीजल पंप से डाले गये धान के दूसरों को खेत से निकाल कर दूसरे खेत में ट्रैक्टर चला रोपनी करने का काम करने में मशगूल दिखे.
नुआंव के किसान लल्लन पांडे, नजबुल होदा, हरिहर सिंह, गुड्डू सिंह ने बताया कि इस बरसात ने किसान द्वारा खेतों में डाले गये धान के बिचड़े अब रोपनी में काम आयेगी. बरसात से एक तरफ जहां 46 डिग्री के तापमान में गिरावट आयी है. वहीं दूसरी तरफ खेतों में डाले गये धान के बिचड़ों को किसान खेतों से निकलकर ट्रैक्टर पर रख खेतों में ले जाने को मसगुल दिखे.
गौरतलब है कि पिछले रोहिणी नक्षत्र बीतने के लगभग डेढ़ माह बाद भी प्रखंड क्षेत्र के करगहर राजवाहा व गारा चौबे नहर में पदाधिकारियों के कई वादे के बाद भी आज तक खेतों में पानी नहीं पहुंचा था. वहीं जनप्रतिनिधियों की उदासीनता को लेकर किसान केवल भगवान के ऊपर ही भरोसा कर अपने सूखे हुए खेतों को तृप्त करने की आस लगाये बैठे हुए थे.
बारिश ने खोल दी जलनिकासी की व्यवस्था
दुर्गावती. स्थानीय प्रखंड क्षेत्र में रविवार एवं सोमवार को हुई बरसात की पहली बारिश ने जलनिकासी की कलई खोल दी है. क्षेत्र में गवई इलाके में भी पूर्ण जलनिकासी का प्रबंधक नहीं होने से गांव की गलियों में नाली का जमा पानी पसरने शुरू हो जाता है. तब स्थिति नारकीय हो जाती है. कुछ इसी तरह का हाल इन दिनों क्षेत्र के खामीदौरा, गोरार, मरहियां सहित बाजार में देखा जा रहा है. जहां बनी पुरानी नालियां टूटकर बिखर गयी है और पानी निकासी नहीं हो पा रही है.