टैक्स तो बढ़ा, पर यात्रियों को नहीं मिल रहीं सुविधाएं

चिंतनीय : लग्जरी बसों में सुरक्षा के मानक दरकिनार अगलगी से बचने का ठोस प्रबंध नहीं 10 साल पहले बसों में स्लीपर की हुई थी व्यवस्था रुपये के लालच में सुविधा पर ध्यान नहीं हरनौत में अगलगी की घटना के बाद भी नहीं चेता प्रशासन नवादा : स्लीपर बसों में अगलगी की घटनाओं से बचने […]

चिंतनीय : लग्जरी बसों में सुरक्षा के मानक दरकिनार
अगलगी से बचने का ठोस प्रबंध नहीं
10 साल पहले बसों में स्लीपर की हुई थी व्यवस्था
रुपये के लालच में सुविधा पर ध्यान नहीं
हरनौत में अगलगी की घटना के बाद भी नहीं चेता प्रशासन
नवादा : स्लीपर बसों में अगलगी की घटनाओं से बचने की कोई सुविधा नहीं रहने से कभी भी यात्रियों के लिये बसें जानलेवा सबित हो सकती है़ एनएच 31 पर लंबी दूरी की बसें जब चलती हैं, तो उनमें सुरक्षा का कोई प्रबंध बस मालिकों द्वारा नहीं किया जाता है़
हालांकि साधारण बसों में दिल दहलानेवाली अगलगी की घटना होने के बाद यात्रियों का बचना जब मुश्किल हो जाता है, तो स्लीपर बसों के अंदर केबिन में सोये यात्रियों को, तो संभलने का भी वक्त नहीं मिल पायेगा़ पिछले दिनों ऐसी ही घटना एक साधारण बस में हो चुकी है. वह बस पटना से शेखपुरा जा रही थी. रास्ते में हरनौत में अचानक हुई अगलगी की घटना के बाद, जो मौत का तांडव लोगों ने अपनी आंखों से देखा, उसे याद कर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं.
बावजूद राज्य सरकार व परिवहन विभाग की नींद नहीं खुली है़ सुरक्षा मानकों का ख्याल नहीं रखा जाना, इस बात को दर्शाता है कि रुपयों के आगे लोगों की जान का कोई मोल नहीं है़ हाल यह है कि ज्यादातर बसों में एक की दरवाजा होता है. वह भी इतना कंजस्टड होता है कि वहां से याित्रयों को निकलने में दिक्कत होती है. केबिन का दरवाजा अगर खोल दिया जाये, तो बस से एक भी यात्री निकल नहीं पायेंगे. होता यह है कि केबिन का दरवाजा इस तरह बनाया जाता है कि यात्रियों को बाहर निकलनेवाला गेट बंद हो जाता है. इस िस्थति में अगर कोई घटना हो गयी, तो किसी को जान बचाना मुश्किल हो जाता है.
प्रति सीट 600 से बढ़ा कर किया 1200
स्लीपर बसों के चलाये जाने का सिलसिला 10 वर्षों से चल रहा है़ राज्य सरकार ने जब इस पर रोक लगाने के लिये पहल शुरू की, तो दो सालों से इसमें संशोधन कर टैक्स को डबल कर दिया गया़ विभाग से मिली जानकारी अनुसार सरकार के प्रधान सचिव व राज्य पथ परिवहन मंत्रालय ने बड़े- बड़े ट्रांसपोर्टरों के साथ मिल कर राज्य सरकार से इस पर व्यवस्था को चालू रखने का अनुरोध किया, जिसके बाद राज्य सरकार इसके टैक्स को डबल कर बसों को चलाने पर राजी हो गयी. बताया जाता है कि यात्री बसों पर परिवहन विभाग द्वारा तिमाही टैक्स देना पड़ता है. इसमें प्रति सीट 600 रुपये निर्धारित है.
स्लीपर का डबल टैक्स यानी 1200 सौ रुपये लिये जाते है़ं इसकी सुरक्षा मानक साधारण बसों की तरह ही है़ क्षमता से अधिक लोड पर कार्रवाई का प्रावधान है, पर महज खानापूर्ति की तरह है़ हालांकि दुर्घटना का एक कारण यात्री बसों की छतों पर क्षमता से अधिक सामान लादना भी है. शहर के पार नवादा पुराने रजौली बस स्टैंड, सद्भावना चौक स्टैंड, अस्पताल रोड हाटपर स्टैंड से लंबी दूरी कोलकाता, टाटा, रांची आदि जगहों के लिए बसें चलती हैं.
क्या कहते हैं यात्री
स्लीपर बसों से सफर करना जितना आरामदायक है, उतना ही खतरनाक भी. गाड़ी जब घाटी से गुजरती है, तो भगवान को याद करते रहते हैं. ट्रेन में रिजर्वेशन नहीं होने पर दो-तीन बार स्लीपर बस से कोलकाता गये हैं. यात्रा करने की हिम्मत नहीं हाेती.
शशि प्रसाद, माल गोदाम, नवादा
लग्जरी स्लीपर बसों में जो सुविधाएं होनी चाहिए वह यहां नहीं मिलती है़ं आकस्मिक दुर्घटना के बाद आग लगने की स्थिति में बस के यात्रियों का बचना मुश्किल हो जाता है़ मजबूरी में यात्रा करनी पड़ती है. गंतव्य तक पहुंचने में दिल की धड़कन बढ़ जाती है.
मो महबूब आलम, हिसुआ, नवादा
क्या कहते हैं अधिकारी
व्हीकल फिटनेस जांच करने का जिम्मा एमवीआइ का होता है़ वैसे नवादा परिवहन विभाग से एक भी स्लीपर बसों का रजिस्ट्रेरशन नहीं किया गया है़ वैसे उन वाहनों पर ओवरलोडिंग को लेकर कार्रवाई की जाती है. स्लीपर बसों में सुरक्षा के मापदंडों का पालन करने के लिये जांच की जायेगी. वैसे एमवीआइ को ही इस पर जांच कर कार्रवाई करनी है़
ब्रजेश कुमार, डीटीओ

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