बिहार के इस मंदिर में 9 दिनों तक महिलाओं के प्रवेश पर रहता है रोक, जानें इसके पीछे की वजह...

Navratri 2024: बिहार के नालंदा जिला के मां आशापुरी मंदिर में नवरात्र के 9 दिन महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगा राहत है. महिलाओं के मंदिर कैंपस में भी प्रवेश करने की इजाजत नहीं दी जाती है. साथ ही पुरुष भी इन 9 दिनों तक मंदिर के गर्भगृह में नहीं जा सकते हैं.

Navratri 2024: बिहार के नालंदा जिला के मां आशापुरी मंदिर में नवरात्र के 9 दिन महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगा राहत है. महिलाओं के मंदिर कैंपस में भी प्रवेश करने की इजाजत नहीं दी जाती है. साथ ही पुरुष भी इन 9 दिनों तक मंदिर के गर्भगृह में नहीं जा सकते हैं. मां आशापुरी मंदिर की यह परंपरा सदियों पुरानी है. मां आशापुरी मंदिर गिरियक प्रखंड के घोसरावां गाँव में है.

मंदिर कैंपस और गर्भगृह में महिलाओं-पुरुषों का प्रवेश रोकने के पीछे की मुख्य वजह तांत्रिक क्रियाओं का होना है. बता दें कि नवरात्र के दौरान मंदिर में विशेष तंत्र-मंत्र की क्रियाएं की जाती हैं. जिससे बुरी शक्तियां सक्रिय हो जाती हैं. ऐसी आशंका जताई जाती है कि इस बीच अगर महिलाएं मौजूद रहेंगी तो बुरी शक्तियां उनके शरीर में प्रवेश कर सकती हैं. इस कारण पूजा विफल हो जाएगी.

बौद्ध भी यहां आकर तंत्र-मंत्र की करते थे साधना

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह परंपरा 9वीं शताब्दी से ही चली आ रही है. नौवीं शताब्दी में यह विश्व का सबसे प्रचलित बौद्ध साधना केंद्र हुआ करता था. बौद्ध यहां आकर तंत्र-मंत्र की साधना किया करते थे. दूर-दूर से तांत्रिक भी आते थे और नवरात्र के दौरान विशेष पूजा करते थे.

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विशेष हवन के बाद महिलाओं को मिलता है प्रवेश

जानकारी के मुताबिक नवरात्रि के मौके पर मां आशापुरी मंदिर के गर्भ गृह में तीन पुजारियों का ही प्रवेश रहता है. सुबह और शाम को 4 से 5 घंटे तक चंडी पाठ होता है, जिसमें विशेष रूप से तांत्रिक विधि भी अपनाई जाती है. नवरात्रि के आखिरी दिन विशेष हवन के बाद महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दे दी जाती है. यही बात पुरुषों के लिए भी लागू होती है. हालांकि पुरुष मंदिर कैंपस में आ सकते हैं.

संजय दत्त के पिता भी यहां लगा चुके हैं हाजिरी

अभिनेता संजय दत्त के पिता सुनील दत्त के अलावा कई बॉलीवुड हस्तियां भी मां के दरबार में हाजिरी लगा चुके हैं. वहीं बिहार के कई राज्यपाल, मुख्यमंत्री के साथ ही कई पॉलिटिशियन भी दरबार में पहुंच चुके हैं. मंदिर में लगे शिलापट्ट के आशापुरी महारानी की मूर्ति ईसा पूर्व 300 की है. मध्य प्रदेश के राजा यशोवर्मन ने आठवीं शताब्दी में यशोवर्मपुर नाम के इस इलाके को बसाया था.

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