Bihar Sharif News : धार्मिक आस्था और सनातन परंपराओं का अद्भुत संगम इन दिनों रहुई प्रखंड क्षेत्र के सुपासंग गांव में देखने को मिल रहा है. यहां वैतरणी नदी के तट पर आयोजित मेले में श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचकर धार्मिक अनुष्ठानों में भाग ले रहे हैं. विशेष रूप से गाय की पूंछ पकड़कर वैतरणी पार करने की परंपरा श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. मान्यता है कि वैतरणी नदी का संबंध जीवन और मृत्यु के बीच के आध्यात्मिक मार्ग से है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, गाय की पूंछ पकड़कर वैतरणी पार करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है. इसी आस्था के साथ श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से इस अनुष्ठान में भाग ले रहे हैं.
आस्था, संस्कृति और परंपरा का संगम बना वैतरणी मेला
मेले में दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालु वैतरणी स्नान कर पूजा-अर्चना कर रहे हैं. श्रद्धालुओं का कहना है कि यह केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति और पूर्वजों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का भी माध्यम है. अनुष्ठान के दौरान श्रद्धालु अपने परिवार की सुख-समृद्धि और पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए भी प्रार्थना करते हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसमें शामिल होते हैं. मेले में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बना हुआ है. श्रद्धालुओं का मानना है कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ के बीच ऐसे धार्मिक आयोजन लोगों को अपनी जड़ों, संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का कार्य करते हैं. यही कारण है कि वैतरणी मेले में हर वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है और यह आयोजन क्षेत्र की धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है.
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