नालंदा : बारिश नहीं होने से किसानों में बढ़ी बेचैनी

राजगीर (नालंदा) : धान की रोपनी का समय निकलता जा रहा है. लेकिन, अब तक राजगीर क्षेत्र में बारिश नहीं होने से किसान बैचेने हैं. किसान भगवान इंद्र की ओर नजरे बिछाये हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं. राजगीर प्रखंड क्षेत्र के किसानों के अनुसार यहां हजारों एकड़ जमीन में धान का रोपनी होती है. […]

राजगीर (नालंदा) : धान की रोपनी का समय निकलता जा रहा है. लेकिन, अब तक राजगीर क्षेत्र में बारिश नहीं होने से किसान बैचेने हैं. किसान भगवान इंद्र की ओर नजरे बिछाये हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं. राजगीर प्रखंड क्षेत्र के किसानों के अनुसार यहां हजारों एकड़ जमीन में धान का रोपनी होती है.
किसानों ने कहा कि अभी पूर्णवश नक्षत्र चल रहा है, यह नक्षत्र धान रोपनी का सबसे उत्तम समय होता है. इस नक्षत्र में रोपे गये धान के बिचड़े अत्यधिक वृद्धि करते हैं, लेकिन इस नक्षत्र के समाप्त होने अब चार की शेष रह गया है. बावजूद अब तक खेतों में पानी के अभाव में दरार में पड़ी है.
किसानों ने कहा कि अगर दो चार दिन में वर्षा नहीं हुआ तो किसान धान की रोपनी नहीं कर सकेंगे. किसानों की माने तो खेतों में लगे धान के बिचड़े भी पानी के अभाव में मुरझाने लगे हैं. किसी तरह पानी का छिड़काव कर धान के बिचड़े को अभी तक बचाया रखा जा रहा है.
परंतु यह पानी के अभाव में बिचड़ों को भी बचाना अब संभव नहीं दिख रजा है. राजगीर के किसान उपेंद्र महतो, चंद्रेश्वर महतो, दिलीप प्रसाद, सुनील कुमार, बसंत, महेंद्र प्रसाद, डोमन यादव, रामरूप महतो, जयनंदन महतो, दिलीप महतो, गाजो महतो, चंद्र प्रकाश प्रसाद, रंजीत कुमार, राजकुमार प्रसाद आदि ने बताया कि बारिश नहीं होने से धान की उपज पर बुरा प्रभाव पड़ेगा. किसानों ने कहा कि पहले वैतरणी नदी में पानी का काफी अंदरुणी स्त्रोत हुआ करता था. जिससे नदी में सालों भर पानी आया करता था.
वर्तमान समय में नदी में बड़े पुल पुलिया और बोल्डर पिचिंग कर दिया गया है. इससे नदी का अंदरुणी जल स्त्रोत पूरी तरह से सूख गया है और नदी से पानी अब बाहर नदी निकल पा रहा है. किसानों ने नदी वैतरणी नदी से बोल्डर पिंचिग तथा बनाये गये पुल-पुलिया को तोड़ने का मांग सरकार से की है.

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