वैश्विक तनाव का असर नालंदा तक, 14% घटी पासपोर्ट बनाने वालों की संख्या

Nalanda News : दुनिया में बढ़ते तनाव और अनिश्चितता का असर अब नालंदा जिले के युवाओं की विदेश यात्रा योजनाओं पर भी दिखने लगा है. वर्ष 2026 की शुरुआत में जहां प्रतिदिन 25 से 30 लोग विदेश जाने के लिए आवेदन कर रहे थे, वहीं अब यह संख्या घटकर 22 से 25 के बीच रह गई है.

Nalanda News : (कंचन कुमार) दुनिया में बढ़ते तनाव और अनिश्चितता का असर अब नालंदा जिले के युवाओं की विदेश यात्रा योजनाओं पर भी दिखने लगा है. वर्ष 2026 की शुरुआत में जहां प्रतिदिन 25 से 30 लोग विदेश जाने के लिए आवेदन कर रहे थे, वहीं अब यह संख्या घटकर 22 से 25 के बीच रह गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अस्थिरता के कारण लोग फिलहाल विदेश यात्रा को लेकर अधिक सतर्क हो गए हैं.

14 प्रतिशत तक घटी विदेश यात्रा की रफ्तार

आंकड़ों के अनुसार पहले प्रतिदिन औसतन 28 आवेदन विदेश यात्रा के लिए प्राप्त हो रहे थे, जबकि वर्तमान में यह संख्या घटकर करीब 23 रह गई है. इस तरह विदेश जाने के आवेदनों में लगभग 14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात लोगों के फैसलों को सीधे प्रभावित कर रहे हैं.

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद बढ़ी चिंता

विशेषज्ञों के मुताबिक रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से ही विदेश यात्रा को लेकर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ था. इसके बाद विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने लोगों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है. इसका प्रभाव रोजगार, शिक्षा और पर्यटन के उद्देश्य से विदेश जाने की तैयारी कर रहे युवाओं पर साफ दिखाई दे रहा है.

खाड़ी देशों और यूरोप की ओर कम हुआ रुझान

नालंदा जिले के अधिकांश युवा रोजगार के लिए खाड़ी देशों और उच्च शिक्षा या पर्यटन के लिए यूरोपीय देशों का रुख करते रहे हैं. लेकिन हालिया तनावपूर्ण परिस्थितियों और संघर्ष की खबरों के कारण कई लोग अपनी यात्रा योजनाओं को टाल रहे हैं. ट्रैवल एजेंसियों के अनुसार पूछताछ और बुकिंग में भी पहले की तुलना में कमी आई है.

नेपाल और थाईलैंड बने नए पसंदीदा गंतव्य

विदेश यात्रा के पारंपरिक विकल्पों में कमी आने के बीच नेपाल, थाईलैंड, भूटान, म्यांमार और श्रीलंका जैसे अपेक्षाकृत सुरक्षित देशों की मांग बढ़ी है. कम खर्च और आसान यात्रा के कारण लोग इन देशों को प्राथमिकता दे रहे हैं. पर्यटन कारोबार से जुड़े लोग इसे बदलते वैश्विक माहौल का परिणाम मानते हैं.

युवाओं के सपनों पर नहीं पड़ा असर

आवेदनों में कमी के बावजूद विदेश में पढ़ाई और रोजगार हासिल करने की युवाओं की इच्छा अब भी बरकरार है. जिले में पासपोर्ट बनवाने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है और इसमें सबसे अधिक हिस्सेदारी 20 से 30 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की है. इससे संकेत मिलता है कि परिस्थितियां सामान्य होने पर विदेश जाने की मांग फिर तेजी से बढ़ सकती है.

नौ वर्षों में 20 हजार से ज्यादा पासपोर्ट जारी

जून 2018 से दिसंबर 2025 तक जिले में 20 हजार से अधिक पासपोर्ट जारी किए जा चुके हैं. कोरोना महामारी के दौर को छोड़ दें तो लगभग हर वर्ष पासपोर्ट आवेदनों में वृद्धि दर्ज की गई है. वर्ष 2025 में रिकॉर्ड 5565 पासपोर्ट जारी हुए, जो विदेश जाने की बढ़ती आकांक्षाओं को दर्शाता है.

डाकघर सेवा ने आसान की पासपोर्ट प्रक्रिया

डाक विभाग के माध्यम से पासपोर्ट सेवा शुरू होने के बाद आवेदन प्रक्रिया पहले की तुलना में काफी सरल और तेज हो गई है. जहां पहले पासपोर्ट बनने में करीब एक माह का समय लगता था, वहीं अब 10 से 15 दिनों के भीतर पासपोर्ट जारी हो रहा है. इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लोगों को बड़ी राहत मिली है.

पीसीसी सुविधा से विदेश जाने वालों को फायदा

नवंबर 2024 से डाकघरों के माध्यम से पुलिस क्लियरेंस सर्टिफिकेट (पीसीसी) की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है. जनवरी 2026 तक जिले में 141 लोगों ने पीसीसी बनवाया है. इनमें वर्ष 2024 में 16 और वर्ष 2025 में 125 आवेदन शामिल हैं. विदेश में नौकरी और पढ़ाई के इच्छुक युवाओं के लिए यह सुविधा काफी उपयोगी साबित हो रही है.

हालात सुधरने पर फिर बढ़ सकती है मांग

विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान गिरावट अस्थायी हो सकती है. जैसे-जैसे वैश्विक परिस्थितियां सामान्य होंगी, विदेश में शिक्षा, रोजगार और पर्यटन के अवसर तलाशने वालों की संख्या में फिर तेजी आने की संभावना है.

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Published by: Vivek Singh

विवेक सिंह माता सीता की धरती और मिथिला का द्वार कहे जाने वाले समस्तीपुर जिले से आते हैं. वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. इससे पहले #The_Newsdharma के साथ डिजिटल मीडिया, ग्राउंड रिपोर्टिंग , और न्यूज़ लेखन के क्षेत्र में कार्य करने का अनुभव रहा है. सामाजिक, राजनीतिक, शिक्षा, युवा, महिला सुरक्षा और जनता से जुड़े मुद्दों पर विशेष रुचि रखते हैं. सरल, तथ्यात्मक और प्रभावी लेखन शैली के माध्यम से पाठकों तक महत्वपूर्ण खबरें और मुद्दे पहुंचाने का निरंतर प्रयास करते हैं. NGO अमर शहीद बिपिन सिंह फाउंडेशन के साथ जुड़कर सामाजिक, स्वास्थ्य, पर्यावरण ,रोजगार और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर भी कार्य करने का अनुभव हैं.

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