Sugar Price Hike: सुबह की चाय हुई महंगी, घर का बजट बिगड़ा, चीनी 68 के पार... जानिए क्या कर रही है सरकार

चीनी के दामों में तीन महीने में 40 फीसदी की तेजी से सरकार की चिंता बढ़ गयी है. कीमतों पर नियंत्रण के लिए 10 लाख टन रॉ शुगर के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दी गयी है और बड़े थोक उपभोक्ताओं पर स्टॉक लिमिट लगायी गयी है.

Sugar Price Hike: देश में चीनी की कीमतों में पिछले तीन महीनों में करीब 40 फीसदी की तेज बढ़ोतरी हुई है. चीनी अब करीब 19 रुपये प्रति किलो तक महंगी हो चुकी है. इसके साथ ही गुड़ के दाम 24 फीसदी, चावल 16 फीसदी और मक्के के आटे की कीमत 11 फीसदी तक बढ़ गयी है. वर्तमान में मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पूर्वी चंपारण और समस्तीपुर समेत कई जिलों में चीनी का थोक भाव 66 रुपए और खुदरा बिक्री 68-70 रुपए प्रतिकिलो है. इन खाद्य वस्तुओं के दाम पिछले कुछ वर्षों में लगभग स्थिर रहे थे, लेकिन हाल के महीनों में तेजी से बढ़े हैं. बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए सरकार ने चीनी के शुल्क मुक्त आयात और थोक उपभोक्ताओं के स्टॉक को लेकर बड़ा फैसला लिया है.

10 लाख टन रॉ शुगर का शुल्क मुक्त आयात

चीनी की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने गुरुवार को टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन रॉ शुगर के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दी है. सरकार का उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाकर कीमतों पर दबाव कम करना है.

इसके साथ ही हर महीने 10 टन से अधिक चीनी की खपत करने वाले थोक उपभोक्ताओं पर स्टॉक लिमिट भी लागू की गयी है. ऐसे उपभोक्ता अब अपनी 15 दिन की खपत के बराबर ही चीनी का स्टॉक रख सकेंगे.

क्यों बढ़ रही है चीनी की कीमत?

जानकारों के मुताबिक, 1 अक्टूबर से शुरू होने वाले 2026-27 चीनी सीजन में ओपनिंग स्टॉक घरेलू खपत की जरूरत के मुकाबले 50 लाख टन से कम रह सकता है. इससे बाजार में उपलब्धता को लेकर दबाव बढ़ने की आशंका है.

इसके अलावा गन्ने और उससे जुड़े उत्पादों का इस्तेमाल एथेनॉल उत्पादन में भी बढ़ रहा है. मानकों के अनुसार एथेनॉल उत्पादन में करीब 67 फीसदी मक्का, चावल की टुकड़ी और खराब अनाज का इस्तेमाल होता है, जबकि शेष 33 फीसदी हिस्सा गन्ने और उसके उत्पादों से आता है.

एथेनॉल उत्पादन का भी दिख रहा असर

ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन के अनुसार, देश में पिछले साल करीब 720 करोड़ लीटर एथेनॉल का उत्पादन हुआ. इसके लिए करीब 1.33 करोड़ टन अनाज और 25 लाख टन चीनी उत्पादन से जुड़े शीरे का इस्तेमाल हुआ. इसमें करीब 34 लाख टन गन्ना भी शामिल था.

खराब अनाज से पशु आहार और पोल्ट्री फीड तैयार होता है. इसकी उपलब्धता घटने से पशु आहार की कीमतें भी 8 से 10 फीसदी तक बढ़ गयी हैं. इसका असर दूध और अंडे की कीमतों पर भी पड़ा है, जो करीब 5 से 10 फीसदी तक महंगे हुए हैं.

किन चिजों पर सबसे ज्यादा असर?

चीनी की आसमान छूती कीमतों का असर चीनी से तैयार होने वाली सभी चीजों और मिठाइयों पर भी पड़ेगा. आने वाले कुछ दिनों में रक्षाबंधन का त्यौहार है. ऐसे में चीनी की कीमतों का लगातार बढ़ना मिठाईयों के रेट पर असर डालेगा. साथ ही हर घरों में सुबह की चाय और खीर महंगी होने वाली है. घर का बजट पर असर पड़ेगा और बेकरी, बिस्कुट, कोल्ड ड्रिंक्स की कीमतों में भी इजाफा होने की संभावना है.

आम लोगों की जेब पर दोहरा असर

चीनी, गुड़, चावल और मक्के के आटे की बढ़ती कीमतों के साथ पशु आहार महंगा होने से दूध और अंडे जैसी रोजमर्रा की जरूरत की चीजों पर भी असर पड़ रहा है. सरकार के शुल्क मुक्त आयात और स्टॉक लिमिट के फैसले से अब घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ने और कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद है.

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By Prabhat khabar news desk

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