सर्वर धीमा, अटका आवेदन; परेशान छात्राएं पहुंचीं विवि

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टैग-कन्या उत्थान योजना

सत्र 2018-21 और 19-22 की छात्राओं को हुई सर्वाधिक दिक्कत

पिता के नाम में अशुद्धि होने से आवेदन का विकल्प का नहीं मिला

कई छात्राओं का गलत डेटा कॉलेज ने कराया उपलब्ध 20-23 व 21-24 में 60 हजार से अधिक का होना है आवेदन

बिचौलिये नाम को जोड़ने का कर रहे दावा, पैसे मांग रहे हैं

वरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुर

स्नातक उत्तीर्ण छात्राओं को मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना का लाभ देने के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. अभी सिर्फ वही छात्राएं आवेदन कर सकती हैं, जिनका नाम पहले से पोर्टल पर है. पोर्टल पर अभी नाम नहीं जोड़ा जा रहा है. यही पता लगाने के लिए छात्राएं परेशान होकर मोतिहारी, बेतिया, वैशाली से पहुंच रही हैं कि उनका नाम पोर्टल पर है भी या नहीं. सर्वर धीमा होने से छात्राओं काे विवरण नहीं मिल रहा है. सत्र 2018-21 व 19-22 में बड़ी संख्या में ऐसी छात्राएं हैं जिनका खुद का नाम या पिता के नाम में अशुद्धि है.स्पेलिंग अलग होने से भी वे आवेदन नहीं कर पा रही हैं. वहीं सत्र 20-23 व 21-24 को मिलाकर 60 हजार से अधिक छात्राओं काे आवेदन करना है. इनका नाम पोर्टल पर उपलब्ध है. विवि की ओर से बताया गया है कि जिनका नाम पोर्टल पर नहीं है, उन्हें इंतजार करना होगा. पोर्टल खुलने पर उनका नाम जुड़ेगा. इसके बाद ही वे आवेदन कर सकेंगी. पोर्टल पर प्रदेश भर में पांच लाख से अधिक छात्राओं का आवेदन होना है. इस कारण सर्वर काफी धीमा हो गया है. पांच सितंबर तक आवेदन का समय दिया गया है.

विवि में जमा कराएं कागजात

जिन छात्राओं का नाम पोर्टल पर हैं, इसके बाद भी वे आवेदन नहीं कर पा रही हैं ; तो ऐसी छात्राओं काे कहा गया है कि वे अपना आधार कार्ड, मूल अंकपत्र व रजिस्ट्रेशन की फोटो कॉपी विवि में जमा करायें. साथ ही जिनका नाम मिस्मैच बता रहा है, वे भी अपना कागजात जमा कराएं. इसमें सुधार के बाद वे आवेदन कर सकेंगी.

बिचौलियों से बचें, जागरूक कर रहा विवि

योजना के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू होते ही बिचौलिये सक्रिय हो गये हैं. वे नाम जोड़ने का भी दावा कर रहे हैं. विवि की ओर से कहा गया है कि छात्राएं उनके झांसे में नहीं आयें. अबतक नया नाम जोड़ने संबंधी कोई पत्र विवि को नहीं मिला है. ऐसे में बिचौलिये उन्हें गुमराह कर ठगी कर सकते हैं. अलग-अलग वाट्सएप ग्रुप पर भी यह दावा किया जा रहा है.

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Author: ANKIT

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