डायबिटीज के मरीजों में बढ़ रहा लीवर फाइब्रोसिस और सिरोसिस का खतरा, 10 साल से अधिक पुराने मरीज रहें सतर्क

लंबे समय से टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित मरीजों में लीवर संबंधी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ गया है. यह खतरा 10 साल से अधिक पुराने डायबिटीज मरीजों में अधिक देखा जा रहा है. जानें इस बारे में विस्तार से.

Health News: टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित मरीजों में लीवर फाइब्रोसिस और सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है. चिकित्सकों के अनुसार लंबे समय से शुगर से पीड़ित मरीजों में यह जोखिम अधिक देखा जा रहा है. अब तक डायबिटीज के प्रमुख प्रभाव आंखों, किडनी और नसों पर माने जाते रहे हैं, लेकिन लीवर से जुड़ी समस्याएं भी मरीजों के लिए चिंता का कारण बन रही हैं. विशेषज्ञों के अनुसार खराब जीवनशैली और समय पर जांच नहीं होने से लीवर की बीमारी का पता देर से चल सकता है.

10 साल से अधिक पुराने डायबिटीज मरीजों में जोखिम अधिक

चिकित्सक डॉ. एसके पांडे के अनुसार डायबिटीज से पीड़ित मरीजों में लीवर फाइब्रोसिस की समस्या देखी जा रही है. खासकर जो लोग 10 साल से अधिक समय से शुगर के मरीज हैं, उनमें लीवर संबंधी बीमारी का जोखिम अधिक हो सकता है.

उन्होंने बताया कि सामान्य मरीजों की तुलना में मोटापे से ग्रस्त डायबिटीज मरीजों में लीवर खराब होने का खतरा अधिक रहता है. वहीं पतले मरीजों में उम्र बढ़ने और किडनी की कार्यक्षमता घटने के साथ लीवर संबंधी बीमारी का जोखिम तेजी से बढ़ सकता है.

लीवर में बीमारी बढ़ने पर भी शुरुआती लक्षण नहीं

स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. एसके पांडे के अनुसार लीवर ऐसा अंग है, जिसमें बीमारी बढ़ने के बावजूद शुरुआती दौर में स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं दे सकते हैं. ऐसे में मरीज को समय पर बीमारी का पता नहीं चल पाता.

उन्होंने डायबिटीज मरीजों को नियमित स्वास्थ्य जांच कराने की सलाह दी है, ताकि लीवर से जुड़ी समस्या का शुरुआती स्तर पर ही पता लगाया जा सके.

फाइब्रोस्कैन और सीरम बायोमार्कर टेस्ट की सलाह

डॉ. एसके पांडे का कहना है कि डायबिटीज मरीज जिस तरह नियमित रूप से आंखों और किडनी की जांच कराते हैं, उसी तरह लीवर की जांच पर भी ध्यान देना चाहिए.

उन्होंने फाइब्रोस्कैन या सीरम बायोमार्कर टेस्ट जैसी जांचों के माध्यम से लीवर की स्थिति का आकलन करने की सलाह दी, ताकि फाइब्रोसिस जैसी समस्या का शुरुआती चरण में पता लगाया जा सके.

समय पर जांच से बीमारी का शुरुआती चरण में पता लगाने में मदद

विशेषज्ञों के अनुसार डायबिटीज मरीजों में लीवर की नियमित जांच पर ध्यान देना जरूरी है. खासकर लंबे समय से शुगर से पीड़ित और मोटापे जैसी समस्या वाले मरीजों को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार जांच करानी चाहिए.

समय पर जांच होने से लीवर में होने वाले बदलावों की पहचान शुरुआती स्तर पर की जा सकती है और डॉक्टर उचित सलाह दे सकते हैं.

यह भी पढ़ें: 3 साल की गरिमा को न्याय दिलाने सड़क पर उतरा नेपाल, वीरगंज-पथलैया मार्ग चौथे दिन भी बंद


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By कुमार दीपू

स्वास्थ्य, राजनीति, समाज और समसामयिक विषयों पर दीपू रिपोर्टिंग करते हैं. इन्हें पत्रकारिता में 16 साल का अनुभव है.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >