मुजफ्फरपुर-सोनबरसा फोरलेन: उत्तर बिहार के विकास को नई रफ्तार देने वाली मुजफ्फरपुर से नेपाल सीमा पर स्थित सोनबरसा तक करीब 83 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क परियोजना को मंजूरी मिल गयी है. करीब 3590 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना से मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी के साथ शिवहर, पूर्वी चंपारण, मधुबनी और नेपाल सीमा से सटे इलाकों की 50 लाख से अधिक आबादी को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है. सड़क बनने से आवागमन आसान होने के साथ व्यापार और रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा.
मुजफ्फरपुर से सीतामढ़ी का सफर होगा आसान
फोरलेन सड़क बनने के बाद मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी के बीच यात्रा समय में बड़ी कमी आने की उम्मीद है. मौजूदा सड़क पर यातायात दबाव और जाम की वजह से यात्रियों को कई बार परेशानी होती है. नया फोरलेन बनने से यात्री और मालवाहक वाहनों की आवाजाही अधिक तेज और सुगम होगी.
नेपाल सीमा की ओर जाने वाले वाहनों के लिए भी यह मार्ग महत्वपूर्ण साबित होगा. इससे सीमावर्ती बाजारों और प्रमुख व्यापारिक केंद्रों के बीच संपर्क मजबूत होगा.
भारत-नेपाल व्यापार को मिलेगा फायदा
सोनबरसा अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक होने के कारण इस सड़क का आर्थिक और सामरिक महत्व काफी अधिक है. फोरलेन बनने के बाद भारत-नेपाल के बीच माल की आवाजाही आसान होने और लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आने की उम्मीद है. स्थानीय व्यापारिक गतिविधियों के बढ़ने से रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं.
7 बड़े पुल और 3 रेलवे ओवरब्रिज बनेंगे
परियोजना के तहत करीब 83 किलोमीटर लंबे फोरलेन कॉरिडोर का निर्माण किया जाएगा. इसमें सात बड़े पुल प्रस्तावित हैं. इनमें बागमती नदी पर करीब 340 मीटर लंबा पुल भी शामिल है. इसके अलावा रेलवे क्रॉसिंग पर निर्बाध आवागमन के लिए तीन रेलवे ओवरब्रिज बनाए जाएंगे.
उत्तर बिहार के कई जिलों को सीधा लाभ
परियोजना से मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी के अलावा शिवहर, पूर्वी चंपारण और मधुबनी समेत सीमावर्ती क्षेत्रों को बेहतर सड़क संपर्क मिलेगा. इससे कृषि उत्पाद, औद्योगिक सामान और अन्य व्यापारिक वस्तुओं की आवाजाही तेज हो सकेगी.
करीब 3590 करोड़ रुपये की यह परियोजना उत्तर बिहार के लिए सिर्फ सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है. बेहतर कनेक्टिविटी से बाजार, व्यापार, रोजगार और सीमापार कारोबार को गति मिलने की उम्मीद है. ऐसे में मुजफ्फरपुर-सोनबरसा फोरलेन आने वाले वर्षों में क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक कॉरिडोर बन सकता है.
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