Muzaffarpur News: मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल में गंभीर हालत में पहुंची एक महिला मरीज की जान चिकित्सकों ने समय रहते इमरजेंसी सर्जरी कर बचा ली. सात साल की शादी के बाद पहली बार गर्भवती हुई महिला के मामले में एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के कारण फैलोपियन ट्यूब फट गई थी और पेट के भीतर भारी रक्तस्राव हो रहा था. हायर सेंटर रेफर करने के बजाय स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रेरणा सिंह और उनकी टीम ने रात में ही इमरजेंसी लैप्रोटॉमी कर उपचार किया.
फटी फैलोपियन ट्यूब से हो रही थी इंटरनल ब्लीडिंग
कुढ़नी थाना क्षेत्र की निवासी महिला के पेट में असहनीय दर्द और गंभीर हालत में सदर अस्पताल पहुंची थीं. बाहर से कराई गई अल्ट्रासाउंड जांच में गर्भाशय के बाहर बाईं फैलोपियन ट्यूब में गर्भ ठहरने की स्थिति सामने आई.
ट्यूब फटने के कारण पेट के भीतर तेजी से रक्तस्राव हो रहा था. स्थिति गंभीर देखते हुए तत्काल उपचार की जरूरत थी.
रेफर करने के बजाय रात में किया इमरजेंसी ऑपरेशन
डॉ. प्रेरणा सिंह और उनकी मेडिकल टीम ने मरीज को भर्ती कर आवश्यक जांच एवं दवाएं देने के बाद रात में ही इमरजेंसी लैप्रोटॉमी करने का निर्णय लिया. सर्जरी के दौरान फटी ट्यूब के कारण हो रहे रक्तस्राव को नियंत्रित किया गया और प्रभावित हिस्से को सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला गया.
ओवरी में छिपी गांठ भी मिली, उसी दौरान हटाई गई
ऑपरेशन के दौरान चिकित्सकों को मरीज के दाहिने अंडाशय में एक गांठ भी मिली, जो पहले कराई गई बाहरी अल्ट्रासाउंड जांच में स्पष्ट नहीं हुई थी. भविष्य में दोबारा सर्जरी की जरूरत और जोखिम को देखते हुए डॉक्टरों ने महिला के पति मो. मजरे आलम से सहमति लेकर उसी ऑपरेशन के दौरान गांठ को भी सफलतापूर्वक हटा दिया.
भविष्य में मातृत्व की उम्मीदों को ध्यान में रखकर उपचार
महिला की यह पहली प्रेग्नेंसी थी और अब तक उनकी कोई संतान नहीं थी. इसी को ध्यान में रखते हुए चिकित्सकों ने सर्जरी के दौरान विशेष सावधानी बरती. अस्पताल प्रबंधन के अनुसार महिला को फिलहाल करीब तीन महीने का रिकवरी ब्रेक दिया गया है. इसके बाद उनकी स्थिति के अनुसार आगे गर्भधारण को लेकर आवश्यक चिकित्सकीय मार्गदर्शन दिया जाएगा.
जिला स्तर पर जटिल इलाज की क्षमता का उदाहरण
सदर अस्पताल की इस चिकित्सा उपलब्धि को जिला स्तर पर जटिल मामलों के सफल प्रबंधन के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है. अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा और आवश्यक संसाधन उपलब्ध होने से गंभीर मरीजों को हर मामले में तत्काल हायर सेंटर रेफर करने की जरूरत नहीं पड़ती.
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