Muzaffarpur News: मुजफ्फरपुर जिले के वाहन मालिकों के लिए राहत भरी खबर है. आगामी 9 मई को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत में ट्रैफिक चालान के भारी-भरकम बोझ को कम करने का सुनहरा मौका है. परिवहन विभाग की विशेष पहल ‘एकमुश्त यातायात चालान निपटान योजना, 2026’ के तहत यातायात नियमों के उल्लंघन से जुड़ी 17 विभिन्न धाराओं में शमन राशि पर 50 प्रतिशत तक की छूट प्रदान की गई है. इस बार ट्रैफिक और परिवहन चालानों के निपटारे के लिए सिकंदरपुर स्टेडियम में विशेष अदालत लगाई जाएगी.
नकद लेकर आएं, ऑनलाइन पेमेंट के भरोसे न रहें
परिवहन विभाग और जिला प्रशासन ने वाहन मालिकों से विशेष अपील की है कि वे लोक अदालत में अपने लंबित ई-चालान का डिटेल प्रिंट आउट और नकद राशि लेकर आएं. अधिकारियों का कहना है कि पूरे देश में एक साथ लोक अदालत होने के कारण बैंकिंग सर्वर पर अत्यधिक लोड रहता है. ऐसे में ऑनलाइन पेमेंट फेल होने की स्थिति में आपको असुविधा हो सकती है. डीटीओ कुमार सत्येंद्र यादव ने बताया कि ट्रैफिक और परिवहन के चालान के लिए अलग-अलग काउंटर होंगे ताकि लोगों को परेशानी न हो.
इन चालानों पर ही मिलेगी सुनवाई की पात्रता
लोक अदालत में केवल उन्हीं चालानों पर सुनवाई होगी जो दिसंबर 2025 तक कटे हुए हैं. स्पष्ट किया गया है कि 31 मार्च 2026 से पूर्व के 90 दिनों से अधिक समय से लंबित चालानों को ही इसमें शामिल किया जाएगा. इसका अर्थ यह है कि वर्ष 2026 में कटे हुए नए चालानों की सुनवाई इस लोक अदालत में नहीं होगी. अधिकारी लगातार स्टेडियम का निरीक्षण कर रहे हैं ताकि व्यवस्था सुचारू रहे.
इन 17 धाराओं में मिलेगी बड़ी राहत
लोक अदालत में जिन प्रमुख धाराओं में जुर्माने की राशि आधी की गई है, उनमें बिना लाइसेंस वाहन चलाना (5000 की जगह 2500), तेज गति (एलएमवी के लिए 2000 की जगह 1000), बिना सीट बेल्ट (1000 की जगह 500), ट्रिपल राइडिंग (1000 की जगह 500) और बिना हेलमेट (1000 की जगह 500) शामिल हैं. इसके अलावा प्रदूषण (PUC) उल्लंघन और रेड लाइट जंप करने जैसे मामलों में भी वाहन श्रेणी के अनुसार भारी रियायत दी गई है.
20 गंभीर धाराओं में कोई छूट नहीं
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि 20 ऐसी धाराएं हैं जिनमें कोई छूट नहीं दी जाएगी. इनमें शराब पीकर गाड़ी चलाना, ओवरलोडिंग, बिना वैध परमिट के वाहन चलाना, नाबालिग द्वारा वाहन चलाना और गलत तरीके से ओवरटेक करना शामिल है. इन गंभीर अपराधों के लिए कानून के अनुसार निर्धारित पूरी शमन राशि का ही भुगतान करना होगा.
मुजफ्फरपुर से प्रेमांशु शेखर की रिपोर्ट
