Muzaffarpur News: जिले में मातृ और शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक बेहतरीन पहल की शुरुआत की है. अब सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद भर्ती रहने के दौरान ही एएनएम (ANM) नवजात शिशुओं की माताओं को बच्चे के सही पालन-पोषण और सुरक्षित देखभाल की बुनियादी ट्रेनिंग देंगी.
जागरूकता की कमी से होने वाली मौतों पर लगेगी लगाम
इस विशेष मुहिम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की माताओं को जागरूक करना है, ताकि सही जानकारी के अभाव में होने वाली शिशु बीमारियों और असमय मौतों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके. अक्सर देखा जाता है कि पहली बार मां बनने वाली महिलाओं को शिशु देखभाल के सही तरीकों का पता नहीं होता है. ऐसे में अस्पताल से छुट्टी मिलने से पहले एएनएम प्रसूताओं को बच्चे की शुरुआती देखभाल से जुड़ी हर छोटी-बड़ी और महत्वपूर्ण जानकारी विस्तार से समझाएंगी.
स्तनपान, पोषण और समय पर टीकाकरण की मिलेगी जानकारी
इस पहल के तहत एएनएम माताओं को बताएंगी कि नवजात के लिए मां का पहला पीला गाढ़ा दूध (कोलोस्ट्रम) कितना जरूरी है. इसके अलावा, शुरुआती छह महीने तक केवल स्तनपान कराने, छह महीने के बाद दिए जाने वाले ऊपरी आहार (पूरक पोषण) और जानलेवा बीमारियों से बचाव के लिए समय पर टीकाकरण के महत्व को भी समझाया जाएगा. सीएस डॉ. सुधीर कुमार ने बताया कि प्रसव के तुरंत बाद का समय माताओं को यह बातें सिखाने के लिए सबसे सही होता है. इस नई व्यवस्था से जिले के मातृ-शिशु स्वास्थ्य के आंकड़ों में बड़ा सुधार आएगा और हर बच्चे को सुरक्षित भविष्य मिलेगा.
मुजफ्फरपुर से कुमार दीपू की रिपोर्ट
